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शनिवार, 16 जुलाई, 2005 को 15:23 GMT तक के समाचार

एक बम जिसने दुनिया को दहला दिया था

अगर हम इतिहास में कुछ पीछे जाएँ तो ठीक 60 साल पहले मेक्सिको मरुस्थल के बीचो बीच एक परीक्षण किया गया.

ये दुनिया का पहला परमाणु बम परीक्षण था.

परीक्षण के बाद पूरा आसमान जैसे चौंधीयाती रौशनी से जगमगा गया.

जगमगाहट ऐसी कि 150 किलोमीटर दूर रहने वाली एक अंधी लड़की ने भी इसे महसूस किया.

इससे पैदा होने वाली कंपन को कई वैज्ञानिकों और सैन्य पर्यवेक्षकों ने भी महसूस किया.

साथ ही देखा 12000 मीटर तक आसामान में फ़ैला रंगीन धुएँ का बादल .

इस लम्हे के प्रत्यक्षदर्शी हैं जे वेक्सलर. उस वक्त को याद करते हुए जे वेक्सलर बताते हैं," हम ज़मीन पर लेट गए थे और अपना सर बाँहों से ढक लिया था. फिर अचनाक हमने देखा कि मरुस्थल से विस्फोट हो रहा है. काफी देर तक वहाँ रोशनी रही. ये सब कुछ वाकई अविश्वनिय था."

ये प्लूटोनियम बम तय योजना के अनुसार फटा और जिस स्टील टॉवर से इसे छोड़ा गया वो तो जैसे ग़ायब ही हो गया.

विस्फोट का असर

ट्रिनीटी टेस्ट के नाम से पहचाना जाना वाला ये परीक्षण इतना सफल होगा इसकी उम्मीद तो ख़ुद परियोजना से जुड़े वैज्ञानिकों ने भी नहीं की थी.

अगर इस विस्फोट के असर की बात करे तो 20,000 टन टीएनटी विस्फोटक के इस्तेमाल से कोई धमाका किया जाए तब जाकर ऐसा ज़बरदस्त विस्फोट होगा.

इस धमाके के बाद घटनास्थल पर 4000 मीटर चौड़ी खाई पैदा हो गई थी.

कहते हैं कि विस्फोट के बाद इतनी तेज़ रोशनी हुई कि दूर दराज़ की बस्तियों में रहने वाले लोगों को लगा मानो सूरज दोबार उग गया हो.

उल्लेखनीय है कि इस बम का निर्माण केवल 28 महीनों में किया गया था.

इस परीक्षण के तीन हफ़्ते बाद दुनिया का दूसरा परमाणु बम हिरोशिमा पर गिराया गया जिसे लिटिल ब्वॉय का नाम दिया गया.

तीन दिन बाद ही नौ अगस्त को नागासाकी पर बम फेंका गया–नाम दिया गया फ़ैट मैन.

इस बम ने नागासाकी शहर को पूरी तरह तहस नहस कर दिया. क़रीब तीन लाख लोग इस हमले में मारे गए.

बम गिराए जाने के एक सप्ताह के अंदर ही जापान ने आत्मसमर्पण कर दिया और इसके साथ ही दूसरा विश्व युद्ध ख़त्म हो गया.

एक ऐसा युद्ध जिसने पाँच करोड़ लोगों की जान ली.