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गुरुवार, 30 जून, 2005 को 17:44 GMT तक के समाचार

अफ्रीका को मदद दोगुनी करने का प्रस्ताव

अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने कहा है कि पश्चिमी देश अफ़्रीका की ग़रीबी को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.

उन्होंने सन् 2010 तक अफ़्रीका को मिलनेवाली सहायता दोगुनी करने का प्रस्ताव रखा है.

माना जा रहा है कि अपने इस इस भाषण से उन्होंने बता दिया है कि अगले सप्ताह दुनिया के आठ शक्तिशाली देशों के समूह जी-8 की शिखर बैठक में अमरीका का एजेंडा क्या होगा.

लेकिन इस शिखर सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन पर उठनेवाले एक और महत्वपूर्ण मुद्दे पर अमरीका का रूख़ क्या रहेगा, इसका कोई संकेत उन्होंने नहीं दिया.

छह से आठ जुलाई तक स्कॉटलैंड के ग्लेनइगल शहर में होनेवाले जी-8 शिखर सम्मेलन में अफ़्रीका पर अमीर देशों के कर्ज़ और जलवायु परिवर्तन का मुद्दा सबसे प्रमुख माना जा रहा है.

अफ़्रीका का कर्ज़

अमरीकी राष्ट्रपति ने अफ़्रीका को अमरीका से मिलनेवाली सहायता राशि को अगले पाँच वर्षों में दोगुना करने की बात की लेकिन साथ ही ये भी कहा कि इन देशों में उनको प्राथमिकता दी जाएगी जहाँ सुधार हो रहे हैं.

बुश ने कहा कि अफ़्रीकी नेताओं को 'सुधारक एजेंट' होना होगा ना कि बस रकम बटोरनेवाले नेता.

बुश ने जिस राशि की बात की है वह राशि, इसी महीने अफ़्रीका की सहायता के लिए 67 करोड़ 40 लाख रूपए देने के बारे में की गई घोषणा से अलग है.

राष्ट्रपति बुश ने इसी महीने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर के साथ अपनी मुलाक़ात के दौरान यह सहायता राशि देने का वायदा किया था.

प्रतिक्रिया

दक्षिण अफ़्रीका सरकार ने राष्ट्रपति बुश की अफ़्रीका के कर्ज़ के बारे में की गई घोषणा का स्वागत किया है.

राष्ट्रपति थाबो एम्बेकी के प्रवक्ता ने कहा,"ये उसी दिशा में उठाया गया एक क़दम है जो हम चाहते थे. अब ये अफ़्रीकी देशों पर निर्भर है कि वे शासन में कैसे सुधार करते हैं".

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर के कार्यालय ने कहा है कि बुश के भाषण ग्लेनइगल सम्मेलन की सफलता की राह तैयार हुई है.

लेकिन ग़रीबी के विरूद्ध काम करनेवाली संस्था एक्शन एड का कहना है कि मदद काफ़ी नहीं है.

एक्शन एट के प्रवक्ता पैट्रिक वाट ने कहा,"ये एक बहुत साधारण सा एक क़दम है जिसे बहुत बड़ा करके दिखाया जा रहा है".

वहीं जलवायु परिवर्तन पर अमरीकी नीति के संबंध में बीबीसी के कूटनीतिक संवाददाता जॉनाथन मार्कस का कहना है कि बुश ने अपनी पुरानी नीति पर ही ज़ोर दिया जिसमें ऊर्जा उत्पादन के लिए नए तरीक़े ढूंढने की बात की जाती रही है.