बुधवार, 29 जून, 2005 को 20:50 GMT तक के समाचार
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने स्वीकार किया है कि एड्स के 30 लाख रोगियों को इस वर्ष के अंत तक इलाज उपलब्ध करवाने के लक्ष्य को पूरा नहीं किया जा सकेगा.
संयुक्त राष्ट्र की संस्था ने कहा है कि अभी केवल 10 लाख एड्स रोगियों को ही एड्स का सामना करनेवाली दवाएँ दी जा सकी हैं.
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अधिकारियों का कहना है कि दिसंबर 2003 में जब ये लक्ष्य निर्धारित किया गया था तब ये संख्या केवल चार लाख थी.
संस्था ने 2005 के अंत तक 30 लाख लोगों तक एड्स का सामना करनेवाली दवाएँ पहुँचाने का लक्ष्य तय किया था.
स्थिति
विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक प्रवक्ता डॉक्टर जिम किम ने कहा है कि अफ़्रीका में कुछ देशों में प्रगति हुई है लेकिन भारत और नाइजीरिया जैसे देशों में स्थिति अभी भी विकट है.
डॉक्टर किम ने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि 30 लाख लोगों तक दवा पहुँचाने का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है लेकिन उसमें अभी डेढ़ वर्ष और लगेगा.
लेकिन अभी पूरी दुनिया में एचआईवी संक्रमित लोगों की संख्या चार करोड़ है.
इनमें से 60 लाख लोग विकासशील देशों में हैं जिनकी हालत गंभीर है.
बाधाएँ
एड्स का सामना करने की राह में मुश्किल ये है कि एक तो मुश्किल ये है कि ऐसे इलाज बहुत अधिक नहीं हैं जिनमें किसी एक गोली से ही काम चल जाता हो.
वहीं बच्चों के लिए दवाएँ बहुत कम हैं और दवाओं के वितरण में भी तकनीकी समस्याएँ आती हैं.
कई देशों में समस्या तालमेल की भी है जिसके कारण दवाओं को पहुँचाने और रोगियों की देखभाल के लिए कर्मचारियों को रखने में भी मुश्किल आ रही है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन को उम्मीद है कि अगले सप्ताह स्कॉटलैंड में जी-8 देशों के सम्मेलन में एड्स का सामना करने के लिए आर्थिक सहायता पर कुछ ठोस नतीजा निकल सकेगा.
संगठन चाहता है कि वर्ष 2005-07 के लिए पूरी दुनिया से 27 अरब डॉलर जुटाने का जो वायदा किया गया है उसे वास्तविकता में तब्दील किया जाए.
मगर इसके साथ ही विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक प्रगति रिपोर्ट में कहा गया है कि तय राशि से ऊपर 18 अरब डॉलर की और आवश्यकता होगी.