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मंगलवार, 28 जून, 2005 को 00:33 GMT तक के समाचार

जाफ़री क़ानून व्यवस्था पर आशान्वित

इराक़ के अंतरिम प्रधानमंत्री इब्राहीम अल-जाफ़री ने कहा है कि देश में सुरक्षा व्यस्था क़ायम करने के लिए दो साल काफ़ी होंगे.

इससे पहले रविवार को अमरीका के रक्षा मंत्री डॉनल्ड रम्सफ़ेल्ड ने कहा था कि इराक़ में शांति स्थापित करने में दस-बारह साल भी लग सकते हैं.

अमरीका ने पिछले वर्ष 28 जून को ऐलान किया था कि इराक़ियों को उनकी संप्रभुता लौटा दी गई है.

उसके बाद अमरीकी फ़ौजों के साये में वहाँ चुनाव भी करवाए गए और एक सरकार भी बन गई लेकिन वहाँ हिंसा का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है.

संप्रभुता की वापसी की पहली वर्षगाँठ के मौक़े पर लोग राजनीतिक दिशा में प्रगति की बात पर ज़ोर दे रहे हैं, ज़ाहिर है, इस हालत में क़ानून-व्यवस्था के बारे में कोई सकारात्मक बात कह पाना काफ़ी मुश्किल है.

यह आशा भी व्यक्त की जा रही है कि तमाम अड़चनों के बीच इराक़ी संसद तय समय सीमा के भीतर देश के संविधान पर रज़ामंद हो जाएगी.

पहले कहा जा रहा था कि जैसे-जैसे राजनीतिक और लोकतांत्रिक व्यवस्था क़ायम होगी चरमपंथ अपने-आप कमज़ोर पड़ जाएगा, लेकिन हक़ीक़त में ऐसा होता नहीं दिख रहा है, असल में हिंसा में वृद्धि ही हो रही है.

यही नहीं, चरमपंथियों की ताक़त भी बढ़ती दिख रही है, उनकी रणनीति तेज़ी से बदल रही है, मिसाल के तौर पर वे अब रिमोट कंट्रोल से धमाके कर रहे हैं, अमरीकी और इराक़ी सैनिकों के मारे जाने की ख़बरें हर रोज़ आ रही हैं.

बातचीत

दो दिन पहले ही अमरीकी रक्षा मंत्री ने स्वीकार किया है कि इराक़ में सक्रिय चरमपंथी गुटों से बातचीत हो रही है, इनमें वे संगठन शामिल नहीं हैं जिनका संबंध अल क़ायदा से है.

अमरीका के चरमपंथियों से बात करने की ख़बर ज़्यादातर लोगों के लिए हैरत की बात थी, लेकिन ज़्यादातर विश्लेषकों ने इसे इसी रूप में देखा कि अमरीका के रूख़ में बदलाव आया है, अब वह मान रहा है कि सिर्फ़ तोप-गोलों से बात नहीं बनने वाली.

इराक़ के वरिष्ठ राजनेता और अमरीकी हमले के बाद शुरूआती महीनों में इराक़ी शासकीय परिषद के सदस्य रहे अदनान पचाची कहते हैं, "अमरीका को समझ में आ गया है कि सिर्फ़ सैनिक ताक़त से चरमपंथ को समाप्त नहीं किया जा सकता, एक तो सैनिकों की संख्या पर्याप्त नहीं है, इराक़ी सेना और पुलिस न तो प्रशिक्षित है, न ही उसके पास चरमपंथियों से निबटने के लिए साधन हैं."

जहाँ तक इराक़ की ध्वस्त हो चुकी सुविधाओं का सवाल है, पुनर्निर्माण पर ख़र्च हुए अरबों डॉलर कहाँ गए पता नहीं चल रहा है, पेट्रोल, पानी, बिजली हर चीज़ की किल्लत नज़र आ रही है.

इस बीच ब्रितानी प्रधानमंत्री ने इराक़ के अंतरिम प्रधानमंत्री इब्राहीम अल जाफ़री से मुलाक़ात की है, दोनों नेताओं ने एक साझा संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया जिसमें जाफ़री ने इराक़ के भविष्य एक काफ़ी आशावादी तस्वीर पेश की.

ब्रितानी प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने अमरीका के चरमपंथियों से बातचीत करने के फ़ैसले को सही ठहराया और कहा कि इराक़ के पुनर्निर्माण के प्रति उनका देश वचनबद्ध है.