हिंद महासागर से लगे भारत समेत 13 देशों में दो लाख से ज़्यादा उन लोगों को याद किया जा रहा है जो छह महीने पहले सूनामी लहरों की भेंट चढ़ गए थे.
इस मौक़े पर प्रभावित इलाक़ों में पुनर्वास कार्यों का भी आकलन किया जा रहा है.
26 दिसंबर 2004 का सूनामी लहरों से भारत समेत 13 देशों में दो लाख से ज़्यादा लोग मारे गए थे.
सबसे बुरी तरह प्रभावित इंडोनेशिया में एक आयोजन में स्थानीय लोगों के साथ संयुक्त राष्ट्र और विश्व बैंक के अधिकारी भी शामिल हुए.
प्रभावित इलाक़ों में राहत और पुनर्वास कार्यों के लिए दुनिया भर से 13 अरब डॉलर की सहायता का प्रस्ताव है.
लेकिन पुनर्वास प्रयासों की धीमी रफ़्तार के कारण इन इलाक़ों में अब भी हज़ारों लोग बेघर बताए जाते हैं.
संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों के अनुसार सूनामी प्रभावित सभी इलाक़ों में पुनर्वास कार्य पूरे करने में पाँच साल तक लग सकते हैं.
आयोजन
इंडोनेशिया के बंदा आचे शहर में राहत कार्यों के समन्वयक संयुक्त राष्ट्र अधिकारी बो एप्सलुंड ने कहा कि सूनामी से प्रभावित लोग अब स्थिति में सुधार देख सकेंगे.
उन्होंने कहा, "हम ऐसी स्थिति में हैं कि आचे के लोगों को अगले एक-दो महीनों में पुनर्वास काम दिखने लगा."
इंडोनेशिया में सवा लाख से ज़्यादा लोग सूनामी लहरों की भेंट चढ़े थे.
इंडोनेशिया में आचे और नियास में सहायता कार्यों के निदेशक कुनतोरो मांग्कुसब्रतो ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सहायता के रूप में 2.8 अरब डॉलर का प्रस्ताव है.
उन्होंने कहा कि इनमें से अधिकतर धन 172 परियोजनाओं पर ख़र्च होगी.
थाईलैंड, मलेशिया और भारत
थाईलैंड में छह महीने बाद आज भी प्रभावित इलाक़ों के समुद्र तटों पर पर्यटकों की संख्या बहुत कम है.
छापामारों के नियंत्रण वाले बट्टिकलोआ में स्थानीय लोगों ने सूनामी प्रभावित इलाक़ों में मलबे से ली गई बैग, जूते, कम जैसी चीज़ों की प्रदर्शनी लागने का फ़ैसला किया है. आयोजकों का कहना है कि इससे प्रभावित लोगों को पीड़ा से उबरने में मदद मिलेगी.
मलेशिया भी सूनामी से प्रभावित हुआ था, हालाँकि वहाँ मात्र 68 लोग मारे गए थे. वहाँ तटीय इलाक़ों में पुनर्वास कार्यों की रफ़्तार बहुत धीमी बताई जाती है.
भारत के अंडमान निकोबार द्वीप समूह में सूनामी से 10 हज़ार से ज़्यादा लोग मारे गए थे. वहाँ ग्रामीणों को शिकायत है कि छह महीने बीतने के बाद भी वहाँ पर्याप्त पुनर्वास योजनाएँ नहीं चलाई जा रही हैं.
हालाँकि भारत में ही नागपट्टनम से बीबीसी संवाददाता सुनील रामन के अनुसार सरकारी राहत और पुनर्वास कार्य से स्थानीय निवासियों को कोई शिकायत नहीं है.
भारत में सूनामी आपदा के छह महीने पूरे होने पर किसी धार्मिक आयोजन की ख़बर नहीं है.