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गुरुवार, 23 जून, 2005 को 16:31 GMT तक के समाचार

शिवानी शर्मा
बीबीसी संवाददाता

ज़ख्म नहीं भरते सालों बाद भी

कहते हैं कि वक़्त के साथ ज़ख़्म भी भर जाते है लेकिन आयरलैंड के पश्चिमी तट पर बसे छोटे से शहर आहाकिस्ता आकर लगता है कि अपने प्रियजनों को खोने का ग़म ज़िंदगी भर नहीं जाता, घाव कभी नहीं भरते.

बीस साल बाद गुरुवार को आहाकिस्ता में कनिष्क विमान हादसे में मारे गए लोगों की याद में क़रीब एक हज़ार लोग जमा हुए.

कनिष्क हादसे की बरसी

यहाँ का माहौल लफ़्ज़ों में बयान करना बहुत ही मुश्किल था. रिश्तेदारों का कहना था कि जिस तरह का मौसम आज यहाँ देखा, बरसात, तेज़ हवाएँ, ठंड, ऐसा ही मौसम 23 जून 1985 को था.

एयर इंडिया की उड़ान संख्या 182 कनाडा से भारत जा रही थी जब अटलांटिक महासगर पर से गुज़रते समय उसमें बम विस्फोट हुआ. इस घटना में सवार सभी 329 लोगों की मौत हो गई थी.

इस शोक सभा में हिस्सा लेने कनाडा और भारत से मारे गए लोगों के सैकड़ों रिश्तेदार पहुँचे.

आँखे नम, एक दूसरे को गले से लगाए ये लोग बस समुद्र की ओर देखते रहे, जैसे किसी की तलाश कर रहे हों.

अपने माता-पिता, भाई-बहन, बच्चों और दोस्तों को खो चुके इन लोगों को वो दिन आज भी नहीं भूलता.

दिल्ली से आए राकेश मल्होत्रा ने इस हादसे में अपना भाई खोया जिनका शव आज तक बरामद नहीं हुआ है. उन्होंने कहा, “ आज ऐसा लग रहा है कि जैसे 20 साल पहले का वो दिन है, उस हादसे की यादें, वो पूरा दृश्य आँखों के सामने छा गया है.”

लता पांडा एक कलाकार हैं, उन्होंने कनिष्क विमान हादसे में अपने पति और दो बेटियों को खोया था. वे आज भी न्याय का इंतज़ार कर रही हैं.

इन लोगों ने शोक सभा में मौदूद कनाडा के प्रधानमंत्री से हादसे के लिए ज़िम्मेदार लोगों को सज़ा देने की अपील की.

इस शोक सभा में भारत में प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री पृथ्वी राज चौहान नें भी हिस्सा लिया.

उन्होंने इस घटना को अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद से जोड़कर देखने पर बल दिया.

उन्होंने कहा, “ ये बहुत ही दुख की बात हैं कि जब भारत पर आंतकवादी हमले हो रहे थे तब अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने गंभीरता से नहीं लिया. अब 11 सितंबर के हमलों के बाद ही आतंकवाद एक अंतरराष्ट्रीय मसला बन गया है. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जब स्कॉटलैंड में होने वाले जी-8 सम्मेलन में हिस्सा लेने जाएंगे तो वहाँ ये मसला ज़रूर उठाएंगे.”

रिश्तेदार आज भी अपने दुख दर्द से उबरने की कोशिश कर रहे हैं. आज उनमें हादसे को लेकर पूरी न्यायिक प्रक्रिया के प्रति काफ़ी रोष और ग़ुस्सा है.

मगर साथ ही थोड़ी उम्मीद भी है कि कनाडा की सरकार इस पूरे मामले की प्बलिक इंक्वायरी यानि दोबारा जाँच करवा रही है जिससे उन्हें न्याय मिल सकेगा और अपनी ज़िंदगी आख़िरकार फिर से शुरू करना मौक़ा भी मिलेगा.