मंगलवार, 21 जून, 2005 को 01:11 GMT तक के समाचार
संयुक्त राष्ट्र में अमरीका के नए राजदूत के रूप में जॉन बोल्टन की नियुक्ति की कोशिशों को तगड़ा झटका लगा है.
राष्ट्रपति जॉर्ज बुश की पसंद जॉन बोल्टन के नाम को मंज़ूरी देने के लिए सीनेट में मतदान कराने की कोशिशें विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी सदस्यों के विरोध के कारण नाकाम हो गई हैं.
जॉन बोल्टन के नाम को मंज़ूरी दिलाने के लिए सीनेट में उसी समय मतदान हो सकता था जब इसके लिए 60 सदस्य राज़ी होते.
लेकिन रिपब्लिकन पार्टी 60 सदस्यों का समर्थन नहीं हासिल कर पाई. 100 सदस्यीय सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी के 55 सदस्य हैं.
डेमोक्रेटिक पार्टी को जॉन बोल्टन के नाम पर आपत्ति है. बोल्टन पर आरोप हैं कि कर्मचारियों के साथ उनका व्यवहार ठीक नहीं है और उन्होंने विदेश मंत्रालय में काम करते समय उन्होंने ख़ुफ़िया जानकारियों का ग़लत इस्तेमाल किया.
वॉशिंगटन स्थित बीबीसी संवाददाता का कहना है कि राष्ट्रपति बुश के लिए यह धक्का ज़रूर है लेकिन बोल्टन के नाम की पुष्टि के बिना भी राष्ट्रपति बुश उन्हें अस्थायी तौर पर संयुक्त राष्ट्र भेज सकते हैं.
पिछले महीने अमरीकी सीनेट की विदेशी मामलों की समिति ने भी इस पद के लिए जॉन बोल्टन के नाम की सिफ़ारिश नहीं की थी.
मंज़ूरी
राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने जॉन बोल्टन को संयुक्त राष्ट्र में दूत के लिए मनोनीत किया था लेकिन ऐसे किसी मनोनयन को सीनेट की मंज़ूरी मिलना ज़रूरी होता है.
जॉन बोल्टन अमरीका में हथियारों के नियंत्रण पर सबसे बड़े विशेषज्ञ समझे जाते हैं और संयुक्त राष्ट्र के कट्टर आलोचक रहे हैं.
बोल्टन की छवि एक कट्टरपंथी की है जो संयुक्त राष्ट्र की आलोचना करने के अतिरिक्त ये भी कहते रहे हैं कि संयुक्त राष्ट्र इराक़, ईरान और उत्तर कोरिया के विरूद्ध सख़्त कार्रवाई नहीं कर रहा.
अमरीका में रिपब्लिकन तथा नव-कट्टरपंथी राजनेताओं में उनकी साख अच्छी है लेकिन पूर्व विदेश मंत्री कॉलिन पॉवेल से उनकी निकटता नहीं थी.
उन्हें उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रमों के बारे में बहुपक्षीय बातचीत में भी शामिल किया गया था.
लेकिन उन्होंने जिस तरह खुलेआम उत्तर कोरिया की आलोचना की उसके बाद उत्तर कोरिया ने उनके साथ बातचीत करने से ही इनकार कर दिया.
लेकिन अमरीकी प्रशासन का कहना है कि जॉन बोल्टन संयुक्त राष्ट्र में अच्छी तरह से कार्य कर सकेंगे.