गुरुवार, 16 जून, 2005 को 03:27 GMT तक के समाचार
गुरुवार से ब्रसेल्स में यूरोपीय संघ की दो दिवसीय बैठक हो रही है.
इस बैठक के लिए आ रहे नेताओं के सामने दो बड़ी समस्याओं का हल निकालने की चुनौती है.
एक तो दो सदस्य देशों में हुए जनमत संग्रह में यूरोपीय संघ के नए संविधान को नकार दिया गया है और दूसरा आने वाले दिनों में खर्च की योजना को लेकर कुछ सदस्य देशों के बीच गहरे मतभेद हैं.
यूरोपीय नेता मान रहे हैं कि यदि इन दोनों मसलों का हल जल्दी नहीं निकाला गया तो यूरोपीय संघ का काम काज लंबे समय तक ठप्प पड़ सकता है.
यूरोपीय आयोग के प्रमुख जोस मनुएल बैरोसो का कहना है कि 25 देशों के प्रमुखों को हर हाल में इन समस्याओं का हल निकालना होगा.
हालांकि वे मानते हैं कि फ़्रांस और नीदरलैंड द्वारा यूरोपीय संघ का संविधान नकार देने के बाद इसे बचा पाना आसान नहीं होगा.
वे मानते हैं कि इसका एक ही उपाय है कि यूरोपीय संघ के संविधान पर एक साल तक कोई बहस ही न की जाए.
संभावना है कि गुरुवार की रात को इस संदर्भ में एक प्रस्ताव लाया जाएगा.
खर्च
दूसरी ओर संघ में सबसे ज़्यादा धन देने वाले जर्मनी और दूसरे देशों का दबाव है कि खर्चों में कटौती किया जाए.
इसके तहत शिक्षा और विदेश विभाग की परियोजनाओँ के खर्चों में कटौती हो सकती है.
लेकिन इस बीच सदस्य देशों के बीच इस बात को लेकर बहस चल पड़ी है कि कौन कितना धन देता है और फ़ायदा किसे कितना होता है.
इस सम्मेलन के अध्यक्ष और लक्ज़मबर्ग के प्रधानमंत्री ज्याँ क्लॉड प्रयास कर रहे हैं कि ब्रिटेन और फ़्रांस के बीच चल रहे विवाद को सुलझाया जा सके.
यूरोपीय मामलों के बीबीसी संवाददाता विलियम हॉर्सली का कहना है कि यदि इस सम्मेलन में इस विषय पर कोई समझौता हो जाता है तो यह आश्चर्य की तरह ही होगा.