शनिवार, 11 जून, 2005 को 13:28 GMT तक के समाचार
मुख्ताराँ माई ने पाकिस्तान सरकार पर आरोप लगाया है कि वो उसे न्याय पाने से रोकना चाहती है. उनका कहना है कि सरकार ने उनका नाम उन लोगों की सूची में डाल दिया है जिनके विदेश जाने पर पाबंदी है.
मुख़्ताराँ माई के बलात्कार का मामला तीन साल पहले प्रकाश में आया था. इस मामले में कथित तौर पर एक कबीले की ग्राम परिषद ने मुख्तार माई के भाई की एक गलती के एवज़ में मुख्ताराँ माई के सामूहिक बलात्कार का फैसला दिया था.
मुख़्ताराँ माई ने बीबीसी को बताया है, " सरकार की कार्रवाइयों से लगता है कि वो नहीं चाहती कि मुझे न्याय मिले."
शुक्रवार को मुज़फ़्फरगढ के मीरवाला गांव से एक बीबीसी संवाददाता के साथी बातचीत में उन्होंने कहा कि गृह मंत्रालय की ओर से चंद दिनों पहले उन्हें सूचित किया गया कि उनके विदेश जाने पर पाबंदी लगा दी गई है.
मुख़्ताराँ माई ने बताया कि गुरुवार को मक़बुल अहमद नामक एक पुलिस अधिकारी उनका पासपोर्ट ले गया और उसकी फ़ोटोकॉपी करवाने के बाद उसे वापिस कर दिया.
मुख़्ताराँ माई ने प्रशासन पर यह आरोप भी लगाया कि पुलिस के लोग उन पर लगातार नज़र रखते है और हर जगह उनका पीछा किया जाता है ताकि उन्हें परेशान किया जा सके.
स्थानीय पुलिस प्रशासन का कहना है कि पुलिसकर्मी मुख्ताराँ माई की सुरक्षा के लिए तैनात किये गए हैं.
मगर मुख्ताराँ माई का यह आरोप भी है कि पुलिस अधिकारी उन पर यह ज़ोर भी डाल रहे हैं कि उनकी सुरक्षा के लिए रखे गए पुलिसकर्मियों के खानेपीने का खर्चा भी वो उठाएं.
मुख़्ताराँ माई ने कहा है कि गुरुवार को वो अपने वकील एतजाज़ हसन से मिलने मीरवाला से लाहौर जाना चाहती थीं मगर पुलिस ने उन्हें जाने से रोक दिया.
अभियुक्त रिहा
बहुचर्चित मुख्ताराँ माई बलात्कार मामले में कल एक और मोड़ आया था जब पाकिस्तान की लाहौर हाई कोर्ट ने इस मामले में हिरासत में रखे गए 12 अभियुक्तों की हिरासत अवधि आगे बढ़ाने से इंकार कर दिया है.
लाहौर उच्च न्यायालय की एक समीक्षा बोर्ड ने यह फैसला किया कि इन अभियुक्तो को क़ानून के अनुसार 90 दिनों से अधिक समय तक हिरासत में नहीं रखा जा सकता.
पंजाब प्रांत की अदालत ने इन अभियुक्तों को हिरासत में भेजने का फैसला किया था.
मुख्ताराँ माई का कथित रुप से बलात्कार हुआ लेकिन इसके बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़ी आलोचना के कारण मामला अदालत तक पहुंचा.