मंगलवार, 24 मई, 2005 को 16:44 GMT तक के समाचार
बीबीसी में छँटनी के सवाल पर मतभेदों को सुलझाने के प्रयासों के तहत बीबीसी के प्रबंधकों और श्रम संगठनों के बीच गुरूवार को बातचीत होगी.
दोनों पक्षों ने औद्योगिक विवादों में मध्यस्थता करनेवाली एक स्वतंत्र संस्था के पास जाने का फ़ैसला किया है.
बीबीसी के पत्रकारों और तकनीशियनों ने सोमवार 23 मई को 24 घंटे की हड़ताल की थी और अब 31 मई को वे 48 घंटे की हड़ताल करनेवाले हैं.
ये हड़ताल बीबीसी प्रबंधन के अगले तीन साल में लगभग 4000 नौकरियों की कटौती के फ़ैसले के विरोध में हो रही है.
श्रम संगठनों ने कहा है कि प्रबंधन के साथ बातचीत के नए क़दम के बावजूद 48 घंटे की हड़ताल वापस नहीं ली जाएगी.
विवाद
बीबीसी के महानिदेशक मार्क थॉम्पसन ने कहा है कि उन्होंने बातचीत का प्रस्ताव बिना किसी शर्त के स्वीकार किया है और खुले मन से इसमें शामिल होंगे.
मार्क थॉम्पसन ने कहा,"हम शुरू से ही ऐसा चाहते थे. बातचीत की मेज़ से हम नहीं हटे थे, और अब हमें खुशी है कि बातचीत हो सकेगी".
वहीं श्रम संगठनों का कहना है कि वे प्रबंधन के साथ 'सार्थक बातचीत' करना चाहते हैं.
साथ ही वे बीबीसी से इस बात की गारंटी चाहते हैं कि किसी कर्मचारी को जबरन नहीं हटाया जाएगा जिसे प्रबंधन नहीं मान रहा है.
राष्ट्रीय पत्रकार संगठन या नेशनल यूनियन ऑफ़ जर्नलिस्ट्स के प्रतिनिधि पॉल मैक्लॉलिन ने कहा कि अब सारा दारोमदार बीबीसी पर है.
उन्होंने कहा,"इस विवाद को ख़त्म करने के लिए हम उनके हर सुझाव को सुनने को तैयार हैं. अगर ऐसा नहीं हुआ तो निश्चित रूप से हम कार्रवाई करेंगे. हम बात करना चाहते हैं लेकिन बात करने के लिए दोनों पक्षों की ज़रूरत होती है."
पहली हड़ताल
सोमवार की हड़ताल के कारण बीबीसी के टेलीविज़न, रेडियो और ऑनलाइन सेवाओं पर अच्छा-ख़ासा असर पड़ा था.
लेकिन कितने लोगों ने हड़ताल की इसे लेकर दोनों ही पक्ष अलग दावे कर रहे हैं.
बीबीसी प्रबंधन का कहना है कि केवल 38 प्रतिशत कर्मचारियों ने हड़ताल की मगर तीनों श्रम संगठन हड़ताली कर्मचारियों की संख्या 55 प्रतिशत बता रहे हैं.
मार्क थॉम्पसन का कहना है कि हड़ताल के दौरान ज़्यादातर लोग काम पर आए और इसका उतना असर नहीं हुआ जितनी कि आशंका जताई जा रही थी.
वहीं श्रम संगठनों ने कहा है कि कर्मचारियों ने चट्टानी एकता का प्रदर्शन किया.