रविवार, 22 मई, 2005 को 13:11 GMT तक के समाचार
अफ़ग़ानिस्तान और अमरीका के बीच बयानबाज़ी में अब संयुक्त राष्ट्र ने भी अपनी राय रखी है.
अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल के उत्तरी हिस्से में बगराम स्थित अमरीकी सैनिक अड्डे पर रखे गए बंदियों के साथ किए गए कथित दुर्व्यवहार के बारे में राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने चिंता जताई थी.
अब अफ़ग़ानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिनिधि जियाँ अरनॉल्ट ने अमरीका का आहवान किया है कि बगराम में अमरीकी सैनिक अड्डे को मानवाधिकार संगठनों की जाँच-पड़ताल के लिए खोला जाना चाहिए.
अरनॉल्ट ने रविवार को काबुल में एक सख़्त बयान जारी किया है. ग़ौरतलब है कि बगराम में अमरीकी सैनिक अड्डे पर बहुत से अफ़ग़ानियों को बंदी बनाकर रखा गया है.
अरनॉल्ट के बयान में कहा गया है, "प्रताड़ना की गंभीरता को देखते हुए ज़रूरत बनती है कि इस तरह के गंभीर अपराधों में लिप्त दोषियों को सज़ा दी जाए, जो माँग राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने भी की है."
बयान में कहा गया है, "अफ़ग़ानिस्तान में अंतरराष्ट्रीय सेना की मौजूदगी देश की सुरक्षा और पुनर्निर्माण के लिए एक मुद्दा बना हुआ है."
"यह बेहद महत्वपूर्ण है कि अंतरराष्ट्रीय सेना अफ़ग़ानिस्तान में बुनियादी मानवाधिकारों की संरक्षा के लिए भी काम करे."
संयुक्त राष्ट्र प्रवक्ता रिचर्ड प्रोवेंशर ने पत्रकारों से कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान के मानवाधिकार संगठनों को बगराम सैन्य अड्डे पर जाने की इजाज़त दी मिलनी चाहिए.
अमरीकी सेना ने अभी इन बयानों पर कोई प्रतिक्रिया ज़ाहिर नहीं की है.
ग़ौरतलब है कि अमरीका के लिए रवाना होने से पहले हामिद करज़ई ने काबुल में कहा था कि वह चाहते हैं कि अमरीका सरकार तमाम अफ़ग़ान क़ैदियों को अफ़ग़ानिस्तान को सौंपे और देश में अमरीकी सैनिकों की कुछ गतिविधियों को भी कम करे.
करज़ई ने कहा कि सभी अफ़ग़ान क़ैदियों को उनकी सरकार को सौंपा जाए, भले ही वे अफ़गानिस्तान में अमरीकी सैनिकों की हिरासत में है या उन्हें ग्वांतनामो बे शिविर में रखा गया है, या फिर कहीं और.