शनिवार, 21 मई, 2005 को 08:19 GMT तक के समाचार
अफ़गानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने माँग की है कि अमरीकी हिरासत में किसी भी अफ़ग़ान क़ैदी के साथ दुर्व्यवहार के दोषी पाए जाने वाले अमरीकी सैनिकों को सज़ा दी जानी चाहिए.
हामिद करज़ई ने कहा है कि इस तरह का दुर्व्यवहार करने वाले लोगों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की ज़रूरत है.
हामिद करज़ई ने कहा है कि वह यह मुद्दा अगले कुछ दिनों में अपनी अमरीकी यात्रा के दौरान उठाएंगे.
अफ़ग़ानिस्तान के बगराम हवाई अड्डे पर लोगों के साथ दुर्व्यवहार के आरोप भी सामने आए हैं.
हामदि करज़ई ने अमरीकी अख़बार न्यूयॉर्क टाइम्स में क़ैदियों के साथ दुर्व्यवहार संबंधी रिपोर्ट छापे जाने के बाद यह बयान दिया है.
अख़बार ने अमरीकी सेना की एक गोपनीय रिपोर्ट के हवाले से कहा है कि दिसंबर 2002 में दो अफ़ग़ान बंदियों की हिरासत में मौत हो गई थी.
रिपोर्ट कहती है कि बगराम हवाई अड्डे पर सैनिक क़ैदियों पर बिना किसी डर के हमले कर सकते थे.
अमरीकी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि उन घटनाओं के संबंध में सात लोगों पर आरोप लगाए गए हैं.
बर्दाश्त नहीं
करज़ई ने कहा कि इस तरह के दुर्व्यवहार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
करज़ई के प्रवक्ता ने बीबीसी से कहा कि जिन सैनिकों ने क़ैदियों के साथ अपमानजनक व्यवहार किया है उन्हें सज़ा मिलनी ही चाहिए.
अमरीकी सरकार ने माना है कि इस रिपोर्ट से दुनिया भर में अमरीका की छवि पर बुरा असर पड़ा है.
अमरीकी सेना की 2000 पृष्ठों की एक जांच के कुछ हिस्से न्यूयॉर्क टाइम्स अख़बार में प्रकाशित हुए हैं जिसमें कहा गया है कि कुछ क़ैदियों को पंखों से बांधकर टांग दिया जाता था और एक महिला जाँचकर्ता पुरुष क़ैदियों के जननांगों पर प्रहार भी करती थी.
अख़बार का कहना है कि उन्हें यह रिपोर्ट अमरीकी सेना की जांच टीम में शामिल एक व्यक्ति ने दी है जो बगराम के जाँच शिविर में पूछताछ के तौर तरीकों से सहमत नहीं थे.
रिपोर्ट में मुख्य रुप से दो अफ़गान क़ैदियों की दिसंबर 2002 में हुई मौत का जिक्र किया गया है. ये दोनों कैदी दिलावर और हबीबुल्लाह 22 साल के टैक्सी चालक थे.
रिपोर्ट में कहा गया है कि कई जांचकर्ता भी इन दोनों क़ैदियों को बेक़सूर समझते थे लेकिन इसके बावजूद उन्हें प्रताड़ित किया गया.
बाद में इस मामले की जांच हुई और 27 सैनिकों के ख़िलाफ़ आपराधिक मामले तय करने का फ़ैसला किया गया लेकिन आगे कोई ख़ास कार्रवाई नहीं हुई.
पेंटागन के प्रवक्ता लैरी डि रीता ने न्यूयॉर्क टाइम्स अख़बार से कहा "हमने इस जांच से पाया कि कुछ लोग ऐसे ज़रुर हैं जिन्होंने मानदंडों का उल्लंघन किया है. "
गंदगी का अंबार
न्यूयॉर्क टाइम्स कहता है कि जाँच में ऐसे युवा और कम प्रशिक्षित सैनिकों का ज़िक्र है जो क़ैदियों के साथ जम कर दुर्व्यवहार कर रहे हैं. ऐसी स्थिति में दो मौतें तो बहुत कम कही जा सकती हैं.
रिपोर्ट में कुछ सैनिकों ने माना है कि कई बार क़ैदियों के जननांगों पर प्रहार किया जाता था और उन्हें जांचकर्ताओं के जूते चाटने को भी कहा जाता था.
इतना ही नहीं कई बार कैदियों को गंदगी से भरे ड्रम में से प्लास्टिक की बोतलें निकालने जैसी घिनौनी सज़ा दी जाती थी.
एक सैनिक ने जांचकर्ताओं को बताया कि क़ैदियों को आतंकवादी माना जाता है जब तक वो निर्दोष साबित न हो जाएं और जेनेवा संधि सिर्फ़ युद्धबंदियों पर लागू होती है.