शनिवार, 21 मई, 2005 को 15:00 GMT तक के समाचार
पिछले दिनों इराक़ में हिंसा की बढ़ती घटनाओं के विरोध में बग़दाद की सभी सुन्नी मस्जिदों को तीन दिन के लिए बंद रखने का आह्वान किया गया है.
सुन्नी नेताओं ने कहा है कि सभी लोगों को अपने-अपने घरों में नमाज़ पढ़नी चाहिए.
इराक़ में शिया और सुन्नी समुदाय के बीच तनाव काफ़ी बढ़ गया है.
बग़दाद से बीबीसी संवाददाता कैरॉलाइन हॉली का कहना है कि कई महीनों से सुन्नी विद्रोही शिया समुदाय के लोगों पर हमला करते आ रहे हैं ताकि इराक़ में गृहयुद्ध भड़काया जा सके.
रणनीति में बदलाव
विद्रोही संगठनों के लोग शिया समुदाय के लोगों को अमरीका समर्थक मानते हैं.
लेकिन पिछले दिनों विद्रोहियों के काम करने के तरीक़े में बदलाव भी आया है. शिया लोगों के साथ साथ अब सुन्नियों को भी निशाना बनाया जा रहा है.
चार दिन पहले ही दो सुन्नी मौलवियों के शव बरामद किए गए थे. इसके बाद ही मस्जिदों को बंद रखने का फ़ैसला किया गया.
सुन्नी समुदाय के लोग आरोप लगा रहे हैं कि दो मौलवियों की हत्या के पीछे शिया मुसलमानों की बादा पार्टी का हाथ है.
खंडन
बादा पार्टी को सरकार में शामिल एक पार्टी का क़रीब माना जाता है, लेकिन बादा पार्टी इन आरोपों का खंडन करती है.
शुक्रवार को इराक़ की सबसे बड़ी शिया पार्टी के नेता अब्दुल अज़ीज़ हकीम ने अपील की कि सभी समुदायों को एकजुट होना चाहिए.
लेकिन एकजुट रहने की तमाम अपीलों के बाद भी शिया और सुन्नी समुदायों के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है.
इन्हीं कारणों से यहाँ आशंका ज़ाहिर की जा रही है कि इराक़ को गृहयुद्ध की ओर खींच ले जाने की कोशिशें चल रही हैं.