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रविवार, 15 मई, 2005 को 16:45 GMT तक के समाचार

वार्ताकारों को आख़िरी मौक़ा: ईरान

ईरान इस बात के लिए राज़ी हो गया है कि वह परमाणु कार्यक्रम फिर से शुरू करने से पहले तीन यूरोपीय देशों से चल रही बातचीत को एक और मौक़ा देगा.

वहीं ईरान की संसद ने एक प्रस्ताव पारित करके सरकार से अपील की है कि वह अपना परमाणु कार्यक्रम फिर से शुरू करे, जिसमें शांतिपूर्ण कार्यों के लिए इस्तेमाल होने वाला यूरेनियम संवर्द्धन भी शामिल हो.

ईरान की संसद में इस प्रस्ताव के समर्थन में 205 सदस्यों में से 188 सदस्यों ने मतदान किया.

संवाददाता इसे ईरानी सरकार पर विवादास्पद परमाणु कार्यक्रम नहीं छोड़ने के लिए और दबाव बनाने की कोशिश के तौर पर देख रहे हैं.

उधर यूरोपीय देशों ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी के साथ चल रही बातचीत को ईरान ने एक अंतिम मौक़ा देने का फ़ैसला किया.

इन यूरोपीय देशों ने धमकी दी है कि ईरान अगर परमाणु कार्यक्रम फिर से शुरू करने का फ़ैसला करता है तो वे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की ओर से ईरान पर प्रतिबंध के अमरीकी प्रस्ताव का समर्थन करेंगे.

'आख़िरी मौक़ा'

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हामिद रज़ा आसफ़ी का कहना है कि समय काफ़ी तेज़ी से बदल रहा है. उनका कहना था कि आने वाले दिनों में जो भी होगा वो यूरोपीय देशों के लिए एक आख़िरी मौक़ा होगा.

हामिद रज़ा ने कहा कि तीनों यूरोपीय देशों के विदेश मंत्रियों के साथ मुख्य ईरानी वार्ताकार हसन रूहानी की बातचीत जल्दी ही होगी.

उन्होंने ये भी कहा कि दक्षिण अफ़्रीका और मलेशिया जैसे देशों की ओर से भी इस बात का दबाव था कि परमाणु कार्यक्रम शुरू करने से पहले इन देशों के साथ बातचीत का एक अंतिम दौर हो.

पश्चिमी देशों को डर है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम का इस्तेमाल सैनिक क्षमता बढ़ाने के लिए कर सकता है और उसे इस रास्ते से अलग करने के लिए उसे कई तरह की सब्सिडी देने की पेशकश भी की गई है.

ईरान का कहना है कि यूरेनियम का संवर्धन उसका अधिकार है मगर साथ ही वो ये गारंटी देने के लिए भी तैयार है कि उसका परमाणु कार्यक्रम सिर्फ़ शांतिपूर्ण कार्यों के लिए ही होगा.