रविवार, 08 मई, 2005 को 20:06 GMT तक के समाचार
इसराइल के प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन ने फ़लस्तीनी क़ैदियों की रिहाई पर रोक लगा दी है. उनकी मांग है कि फ़लस्तीन चरमपंथियों के ख़िलाफ़ और कड़ी कार्रवाई करे.
प्रधानमंत्री शेरॉन और फ़लस्तीनी नेता महमूद अब्बास के बीच फरवरी में हुए समझौते के तहत 400 और फ़लस्तीनी क़ैदी छोड़े जाने थे.
लेकिन हाल में इसराइल ने ये शिकायत की थी कि उसके शहरों पर लगातार रॉकेट से हमले किए जा रहे हैं. इसके कारण इसराइल-फ़लस्तीन संबंधों में कड़वापन दिख रहा है.
दूसरी ओर फ़लस्तीनी नेताओं का कहना है कि इसराइल अपना वादा पूरा करने से अब पीछे हट रहा है. रविवार को ही क़ैदियों की रिहाई पर मंत्री स्तरीय बातचीत होनी थी.
लेकिन प्रधानमंत्री शेरॉन के प्रवक्ता रानन गिसिन ने कहा है कि इसराइल की आने वाले दिनों में फ़लस्तीनी क़ैदियों को छोड़ने की कोई योजना नहीं है.
कार्रवाई
गिसिन ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि इसराइल फ़लस्तीनी क़ैदियों की रिहाई में रोड़े नहीं अटका रहा है जिसपर फरवरी में मिस्र में हुए सम्मेलन में सहमति हुई थी.
लेकिन उन्होंने कहा कि इसराइल चाहता है कि महमूद अब्बास फ़लस्तीनी चरमपंथियों के ख़िलाफ़ और कड़े क़दम उठाएँ ख़ासकर उनके ख़िलाफ़ जिन्होंने हाल में गज़ा पट्टी में इसराइली ठिकानों पर रॉकेट दाग़े हैं.
माना जा रहा है कि इसराइली प्रधानमंत्री शेरॉन ने अपने कैबिनेट से कहा है कि इसराइली लोगों की ज़िंदगी की क़ीमत पर रिहाई नहीं होगी.
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के हवाले से शेरॉन को यह कहते बताया गया है कि आतंकवाद के ख़िलाफ़ कड़े क़दम उठाने से पहले कोई फ़लस्तीनी क़ैदी नहीं छोड़ा जाएगा.
मिस्र में हुए शिखर सम्मेलन के बाद 21 फरवरी को 500 फ़लस्तीनी क़ैदियों को इसराइल ने छोड़ दिया था. सम्मेलन में वादा किया गया था कि 900 क़ैदियों को सदभावना के तहत छोड़ा जाएगा.