शुक्रवार, 06 मई, 2005 को 16:23 GMT तक के समाचार
सलीम रिज़वी
न्यूयॉर्क से
ग्यारह सितंबर के हमलों में ध्वस्त हुए वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के दो टावरों की जगह बनाए जाने वाले फ्रीडम टावर नामक एक भव्य स्मारक को बनने में अब और देर लगेगी.
वजह ये है कि इस स्मारक की डिज़ाइन नए सिरे से तैयार की जाएगी. मौजूदा डिज़ाइन न्यूयॉर्क पुलिस विभाग के सुरक्षा पैमाने पर खरी नहीं उतरी और उसे रद्द कर दिया गया है.
पुलिस विभाग ने इमारत के सुरक्षा इंतज़ाम में खामी के कारण मौजूदा डिज़ाइन को पास नहीं किया है.
अब न्यूयॉर्क के गवर्नर ज़ॉर्ज पैट्की का कहना है कि स्मारक की नई डिज़ाइन पर जल्द ही काम शुरू होगा. गवर्नर कहते हैं, “ स्मारक को नए सिरे से डिज़ाइन किया जाएगा जो कि पुलिस विभाग के सुरक्षा निर्देशों और मापदंडों के अनुकूल होगी.”
लेकिन यह काम इतना आसान भी नहीं है.
करीब तीन साल के वाद-विवाद और माथापच्ची के बाद एक स्मारक के डिज़ाइन पर सहमति हो पाई थी, अब इस डिज़ाइन में फेरबदल करने में भी खासा समय लगेगा.
पुलिस का कहना है कि इस इमारत की मौजूदा डिज़ाइन में सुरक्षा की दृष्टि से कई खामियाँ हैं. पुलिस के मुताबिक इस 1776 फुट ऊँची इमारत को सबसे बड़ा खतरा यह है कि इसे ट्रक में बम भरके उड़ाया जा सकता है.
पुलिस का कहना है कि इस डिज़ाइन के हिसाब से एक सड़क इमारत के बहुत करीब से गुज़रती है और इस सड़क का इस्तेमाल करके आतंकवादी किसी वाहन में बम भरकर इस इमारत को धमाके से उड़ा सकते हैं.
इमारत से लगी हुई एक भीड़भाड़ वाली सड़क गुज़रती है और पुलिस का कहना है कि ऐसे में वाहनों पर नज़र रखना मुश्किल है.
अब नई डिज़ाइन में सुरक्षा के हिसाब से बदलाव करने के बाद इस इमारत की कुल लागत में भी करोड़ों डॉलर ज़्यादा ख़र्च होने की संभावना व्यक्त की जा रही है.
बहुत से लोग इस बात पर नाराज़गी का भी इज़हार कर रहे हैं कि जब डिज़ाइन चुने गए थे तभी पुलिस या सुरक्षा विभाग से इसे पास क्यों नहीं कराया गया था.
ग्यारह सितंबर के हमलों में ध्वस्त हुए इन टावरों की जगह सरकार ने उन हमलों में मरने वालों की याद में एक भव्य स्मारक बनाने की घोषणा की थी.
लेकिन सुरक्षा को किसी भी तरह अंदेखा न करने के मकसद से इस इमारत को एक बेहद सुरक्षित इमारत बनाने की कोशिश की जा रही है.
न्यूयॉर्क के मेयर माइकल ब्लूम्बर्ग कहते हैं, “फ्रीडम टावर आज़ादी का प्रतीक है इसलिए आज़ादी के दुश्मन इस इमारत को निशाना बनाने की कोशिश करेंगे. ”
कुल नौ डिज़ाइनों में से जर्मनी के डिज़ाइनर डेविड लिबस्किंड की डिज़ाइन को 2003 में चुना गया था और पिछले साल जुलाई में इस इमारत के निर्माण कार्य का श्रीगणेश भी किया गया था.