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शनिवार, 30 अप्रैल, 2005 को 01:29 GMT तक के समाचार

वियतनामी जीत की तीसवीं वर्षगाँठ

वियतनाम युद्ध की तीसवीं बरसी के मौक़े पर देश भर में बड़े पैमाने पर कार्यक्रम आयोजित किए गए.

पहले सैगोन के नाम से जाने जाने वाले शहर हो चि मिन्ह सिटी में आतिशबाज़ी और सैनिक परेड का आयोजन किया गया.

वियतनाम के प्रधानमंत्री फान वान खाई ने कहा है कि "तीस अप्रैल 1975 की जीत हमेशा के लिए हमारे देश के इतिहास में दर्ज हो गई है."

तीस अप्रैल 1975 को अमरीकी सेना को छह वर्ष तक चली लड़ाई के बाद वियतनाम से पराजित होकर लौटना पड़ा था, इस लड़ाई में लगभग तीस लाख वियतनामी और 58 हज़ार अमरीकी मारे गए थे.

वियतनामी प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के सामने अब भी बहुत सारी चुनौतियाँ हैं और अब देश को अतीत से निकलकर भविष्य की ओर देखना चाहिए.

वियतनाम में तीस अप्रैल को 'मुक्ति दिवस' के रूप में मनाया जाता है, उत्तरी वियतनाम की कम्युनिस्ट सेना की अमरीका समर्थित दक्षिणी वियतनाम के ख़िलाफ़ जीत की वर्षगाँठ.

वियतनाम की सरकार का कहना है कि इस वर्षगाँठ के आयोजन से देश के नौजवानों में देशभक्ति की भावना जागेगी.

वियतनामी प्रधानमंत्री ने राजधानी में युद्ध में शामिल रहे सैनिकों, बुज़ुर्ग नेताओं और विदेशी कूटनयिकों के सामने भाषण में कहा कि "अमरीका के ख़िलाफ़ हमारी जनता की राष्ट्रीय मुक्ति की लड़ाई में जीत हमारे इतिहास का स्वर्णिम पन्ना बन चुका है."

जब वियतनामी प्रधानमंत्री ने यह भाषण दिया उस समय वियतनाम में अमरीका के राजदूत भी वहाँ उपस्थित थे, वियतनामी प्रधानमंत्री ने ज़ोर देकर कहा कि वे अमरीका सहित सभी देशों के साथ मैत्रीपूर्ण सहयोग बढ़ाने के इच्छुक हैं.

समारोह

राजधानी हनोई में आयोजित कार्यक्रम में एक विशाल मंच पर अभिनेताओं ने लड़ाई के दृश्य प्रस्तुत किए जिसमें अमरीकी लड़ाकू विमानों को जलकर गिरते हुए दिखाया गया, इसमें लड़ाई में मारे जाने वाले वियतनामी सैनिकों की बहादुरी भी दिखाई गई.

लेकिन मुख्य कार्यक्रम हो चि मिन्ह सिटी में आयोजित किए गए जिनमें लड़ाई में शामिल रहे सैनिकों और तीस अप्रैल 1975 को पैदा हुए लोगों की परेड भी शामिल थी.

पूरे देश में वियतनाम के झंडे लहरा रहे हैं, हर जगह तीसवीं वर्षगाँठ और राष्ट्रनायक हो चि मिन्ह के पोस्टर लगे हैं.

तीसवीं वर्षगाँठ के आयोजन में विदेशी मेहमानों को आमंत्रित नहीं किया गया है लेकिन क्यूबा के राष्ट्रपति फ़िदेल कास्त्रो के छोटे भाई और रक्षा मंत्री राउल कास्रो वहाँ मौजूद रहे.

अमरीका के ख़िलाफ़ लड़ाई में चीन, क्यूबा और सोवियत संघ ने वियतनाम का साथ दिया था.