बुधवार, 27 अप्रैल, 2005 को 07:22 GMT तक के समाचार
विश्व के सबसे बड़े यात्री विमान ने एयरबस ए-380 बुधवार को पहली परीक्षण उड़ान भरी.
पूरी तरह इलेक्ट्रानिक उपकरणों से जांच के बाद यह विमान उड़ा.
इस विमान को सबसे पहले जनवरी में दुनिया को दिखाया गया था और अब इस विमान ने परीक्षण उड़ान भरी है.
यह विमान दो मंज़िलों की तर्ज़ पर तैयार किए गए इस विमान में 840 यात्री बैठ सकते हैं.
विमान को बनाने वाली कंपनी एयरबस ने इस परियोजना में काफ़ी धन लगाया है और उसकी योजना दुनिया के प्रमुख हवाई अड्डों के बीच ऐसे बड़े विमान चलाने की है.
एयरबस की प्रतिद्वंद्वी कंपनी बोइंग ने मझोले आकार के छोटे विमानों पर ध्यान केंद्रित किया है.
परीक्षण
एयरबस ए-380 दक्षिणी फ्रांस के टोलूज़ से उड़ान भरी. जहाँ इसे तैयार किया गया है.
इस उड़ान को देखने के लिए हज़ारों की संख्या में लोग जमा हुए.
इस विमान की सेवाएँ शुरु होने में कम से कम एक साल का समय लग सकता है क्योंकि एक साल तक कई परीक्षण होने हैं और कई प्रकार के प्रमाण-पत्र भी इस विमान को लेने होंगे.
फ्रांस के राष्ट्रपति जॉक शिराक समेत कई यूरोपीय नेताओं ने इसे यूरोप की सफलता की कहानी क़रार दिया है लेकिन विमान के निर्माण में समस्याएँ भी कम नहीं रही हैं.
हालाँकि एयरबस का कहना है कि उसने ऐसे 154 विमान बेचने का प्रबंध कर लिया है और उनका लक्ष्य ऐसे 200 विमान बेचने का है.
एयरबस कंपनी के 80 प्रतिशत शेयर यूरोपीय फर्म ईएडीएस के हैं जबकि 20 प्रतिशत ब्रिटेन की बीएई के पास हैं.
एयरबस ए-380 के निर्माण के दौरान अमरीका और यूरोप के बीच उड्डयन क्षेत्र को सब्सिडी देने को लेकर भी विवाद शुरु हो गया था.
यूरोपीय संघ और अमरीका ने एक दूसरे पर एयरबस और बोइंग को अवैध रुप से सरकारी सब्सिडी देने का आरोप लगाया था.