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मंगलवार, 26 अप्रैल, 2005 को 20:55 GMT तक के समाचार

नगेंदर शर्मा
बीबीसी संवाददाता

गाँधी सोसायटी शिक्षा क्षेत्र में अग्रणी

इंडोनेशिया में भारतीय समुदाय जो महात्मा गाँधी शैक्षणिक सोसायटी चला रहा है उसकी गिनती आज के दौर में इस पूर्वी एशियाई देश की सफल शिक्षण संस्थाओं में होती है.

यहाँ आकर बसे भारतीय समुदाय ने 1947 के आसपास, उस समय महात्मा गाँधी की लोकप्रियता से प्रभावित होकर, अपने बच्चों के लिए राजधानी जकार्ता में उनके नाम पर एक छोटा सा स्कूल खोला था.

अभिवाजित भारत के हैदराबाद सिंध और पंजाब के काफ़ी लोग जो बँटवारे के बाद पाकिस्तान में नहीं रहना चाहते थे, उन्होंने इंडोनेशिया का रुख़ किया था.

उस समय के अधिकतर लोग महात्मा गाँधी को देख तो नहीं पाए, लेकिन उनके संस्कार अपनाने के प्रयास में लग गए.

लगभग छह दशक पहले एक छोटे से स्कूल से शुरुआत करने वाली महात्मा गाँधी शैक्षणिक सोसायटी के सफल सफर का पता इस बात से चलता है कि आज ये विस्तार कर तीन उच्च श्रेणी के स्कूल और एक स्नातकोत्तर विश्विद्यालय चला रही है.

इस सोसाइटी के निदेशक डॉ अशोक पाल सिंह का कहना है कि स्थानीय ज़रुरतों को ध्यान में रखते हुए व सही मानकों का पालन करने से गाँधी समूह लगातार आगे बढ़ने में सफल है.

डॉ सिंह का कहना है “इस समय गाँधी समूह की शिक्षण संस्थाओं में 6 हज़ार छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं. जल्दी ही हम प्रसिद्ध पर्यटक द्वीप बाली में नया स्कूल खोलने जा रहे हैं, जिसके लिए सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं.

"गाँधीजी के सिद्धांतों पर चलते हुए हम अपने सकूलों और कॉलेजों में छात्रों को परिश्रम पर ही विश्वास करने की सीख देते हैं”.

जकार्ता के महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय स्कूल में 30 विभिन्न संस्कृतियों के बच्चे पढ़ने आते हैं, जिनमें कई देशों के राजदूतों के बच्चे शामिल हैं.

इस स्कूल की नई इमारत में सभी आधुनिक सुविधाएं छात्रों को उपलब्ध करवाई गईं हैं, जिनमें हर कक्षा में ब्रॉडबैंड इंटरनेट कनेक्शन शामिल हैं.

महात्मा गँधी सोसाइटी समाजसेवा के ट्रस्ट की देखरेख में काम कर रही है, और पूरी तरह स्वायत्त संस्था है. इंडोनेशिया की सरकार से ये सोसायटी कोई आर्थिक सहायता नहीं लेती.

महात्मा गाँधी शैक्षणिक सोसाइटी के स्कूल ब्रिटेन और स्विटज़रलैंड के विश्विद्यालयों और पिछले चार वर्षों से इंडोनेशिया सरकार की मान्यता से काम कर रहे हैं.

गाँधी सोसायटी के स्कूलों में नज़र दौड़ाने से पता चलता है कि अब इंडोनेशिया के मूल निवासियों के बच्चे भी अच्छी ख़ासी संख्या में इन स्कूलों में पढ़ रहे हैं.