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बुधवार, 13 अप्रैल, 2005 को 08:53 GMT तक के समाचार

'कनिष्क हादसे की दोबारा जाँच हो'

कनाडा की संसद ने 1985 में हुए एयर इंडिया कनिष्क विमान हादसे की 'पब्लिक इंक्वायरी' यानि दोबारा जाँच करवाए जाने की सिफ़ारिश की है.

हाल में कनाडा की अदालत कनिष्क कांड के दोनों अभियुक्तों रिपुदमन सिंह और अजायब सिंह बागड़ी को निर्दोष क़रार दिया था.

एयर इंडिया के विमान कनिष्क में उस समय एक भयंकर बम विस्फोट हुआ था जब वह अटलांटिक महासागर के ऊपर से गुज़र रहा था.

23 जून 1985 को हुई इस घटना में विमान में सवार सभी 329 लोगों की मौत हो गई थी.

समाचार एजेंसियों के अनुसार कनाडा की संसद में पूरा विपक्ष इस मुद्दे पर एक हो गया और 172 के मुकाबले 124 मतों से दोबारा जाँच करवाए जाने की सिफ़ारिश का प्रस्ताव पारित हो गया.

संसद में सरकार इस प्रस्ताव से सहमत नज़र नहीं आई और अब सरकार पर निर्भर है कि वह जाँच करवाती या नहीं.

संसद में तीखी बहस

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार विपक्षी कंज़रवेटिव पार्टी के ब्रिटिश कोलंबिया सांसद गुरमंत गरेवाल ने ये प्रस्ता रखा था लेकिन सत्ताधारी पक्ष ने इसका समर्थन नहीं किया.

उपप्रधानमंत्री एनी मक्कलैलन ने जाँच की जगह सुझाया है कि वे एक प्रमुख व्यक्ति से इस मामले पर पुनर्विचार और अपनी सिफ़ारिश देने के लिए कहेंगी.

संसद में विपक्षी नेता स्टीफ़ेन हार्पर ने कहा कि क्या ये जाँच जल्द हो जाती यदि मारे गए लोगों में गोरे लोगों की संख्या ज़्यादा होती ज़्यादा?

इस पर तीखी बहस छिड़ गई. प्रधानमंत्री पॉल मार्टिन ने गुस्से में कहा कि रंगभेद के आरोप बेबुनिया हैं और स्वीकार्य नहीं हैं. उनका कहना था कि उपप्रधानमंत्री मक्कलैलन पीड़ित परिवारों से बातचीत कर रही हैं.

सबसे भीषण चरमपंथी हमला

ग्यारह सितंबर 2001 को अमरीका पर हुए हमलों से पहले तक कनिष्क विमान धमाका विमान इतिहास में सबसे भयंकर चरमपंथी हमला माना जाता था.

एयर इंडिया की उड़ान संख्या 182 कनाडा से भारत जा रही थी और वह टोरंटो से उड़ान भरकर मांट्रियाल में भी कुछ देर के लिए रुकी थी.

जिस समय उसमें बम विस्फोट हुआ, तब वह लंदन के हीथ्रो हवाई अड्डे से क़रीब 45 मिनट की दूरी पर था.

कनिष्क विमान ब्रितानी समय के मुताबिक सुबह आठ बजकर 16 मिनट पर अचानक राडार से ग़ायब हो गया था और विस्फोट के बाद विमान का मलबा आयरलैंड के तटवर्ती इलाक़े में बिखर गया था.

विमान में ज़्यादातर भारतीय मूल के यात्री थे जो मुंबई या दिल्ली जा रहे थे.

इस मामले की जाँच 15 साल से अधिक समय तक चली.