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मंगलवार, 12 अप्रैल, 2005 को 19:12 GMT तक के समाचार

इराक़ी सैनिकों की संख्या अधिकः बुश

अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने कहा है कि इराक़ एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है और उसके अपने सैनिकों की संख्या अमरीकी सैनिकों से अधिक हो गई है.

बुश ने कहा कि इराक़ में अभी 1,40,000 अमरीकी सैनिक मौजूद हैं जबकि इराक़ी सुरक्षाकर्मियों की संख्या 1,50,000 हो गई है.

उन्होंने टेक्सास में सैनिकों को संबोधित करते हुए कहा कि इराक़ी पुलिस और सैनिकों की संख्या और सामर्थ्य बढ़ रही है और इस कारण गठबंधन सेना को पीछे हटने का अवसर मिल रहा है.

उन्होंने कहा कि इराक़ के लोगों को अब ये विश्वास हो गया है कि उनके अपने सुरक्षाकर्मी उनकी रक्षा कर सकते हैं.

बुश ने कहा,"इराक़ में लोकतंत्र की सफलता से बेरूत से लेकर तेहरान तक ये संदेश जा रहा है कि आज़ादी हर राष्ट्र का भविष्य हो सकती है".

अमरीकी राष्ट्रपति के इन बयानों के बीच इराक़ में फिर हिंसा की घटनाएँ घटी हैं.

हिंसा

इराक़ के शहर मूसल में एक कार बम हमले में कम-से-कम पाँच इराक़ी मारे गए हैं जबकि तीन अन्य घायल हो गए हैं.

एक अमरीकी काफ़िले पर ये हमला अमरीकी रक्षा मंत्री डोनाल्ड रम्सफ़ेल्ड के दौरे के ठीक पहले हुआ.

उधर उत्तरी बग़दाद में चरमपंथियों ने घात लगाकर एक और हमला किया जिसमें गृहमंत्रालय के एक अधिकारी के अंगरक्षक की मौत हो गई तथा तीन अन्य घायल हो गए.

अमरीका और इराक़ के सैनिकोंने सोमवार सुबह मध्य और दक्षिणी बग़दाद में सघन छापेमारी कर कई विद्रोहियों को गिरफ़्तार किया है.

रम्सफ़ेल्ड की चेतावनी

मंगलवार को अचानक बग़दाद पहुँच गए रम्सफ़ेल्ड ने चेतावनी दी कि इराक़ में नई सरकार आने की सूरत में राजनीतिक बदला नहीं लिया जाना चाहिए.

रम्सफ़ेल्ड ने इराक़ी नेताओं से बातचीत के बाद कहा,"ये आवश्यक है कि नई सरकार अपने मंत्रालयों में लोगों की योग्यता पर ध्यान दे और किसी तरह के अनावश्यक बखेड़े से बचे".

रम्सफ़ेल्ड ने कहा कि इराक़ सरकार को लोकतंत्र हासिल करने और चरमपंथ को रोकने के अपने लक्ष्य पर बने रहना चाहिए.

दरअसल अमरीका ने इराक़ पर चढ़ाई के बाद इराक़ी सेना को भंग कर दिया था लेकिन बाद में इस फ़ैसले को एक बड़ी भूल बताया गया.

अब इराक़ी अंतरिम सरकार ने कई अनुभवी पूर्व सैनिकों को फिर से नियुक्त किया है जो सद्दाम हुसैन के समय सेना में रह चुके हैं.

बग़दाद में बीबीसी की संवाददाता का कहना है कि अमरीका अब इस बात से चिंतित है कि इन पूर्व सैनिकों के कारण चरमपंथ का सामना करने में मुश्किल आ सकती है.

सद्दाम हुसैन के समय इराक़ में सुरक्षाकर्मियों ने शियाओं का काफ़ी दमन किया था और ऐसा हो सकता है कि अब सत्ता में प्रभावी शिया उनसे बदला लें.

इराक़ में पिछले वर्ष 10,000 सैनिकों का एक विशेष दस्ता तैयार किया गया था जिसमें अधिकांश लोग पिछली सेना में शामिल थे.

एक अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि इनमें से कुछ लोगों ने 1991 में शियाओं के विद्रोह को कुचलने में हिस्सा लिया था.