सोमवार, 11 अप्रैल, 2005 को 13:33 GMT तक के समाचार
ब्रिटेन में आज संसद के निचले सदन को भंग कर दिया गया है जिसके साथ ही संसदीय चुनाव की उलटी गिनती शुरू हो गई है.
विपक्षी कंज़र्वेटिव पार्टी ने तो अपना चुनावी घोषणापत्र भी जारी कर दिया है जबकि सत्ताधारी लेबर पार्टी और तीसरे सबसे बड़े दल लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी ने भी महत्वपूर्ण घोषणाएँ की हैं.
कंज़रवेटिव पार्टी ने अपना चुनावी घोषणापत्र काफ़ी संक्षिप्त रखा है और उसके नेता माइकल हावर्ड कहते हैं कि ऐसा जानबूझ कर किया गया है जिससे लोग उसे पढ़ें ज़रूर.
वैसे वास्तविकता यही है कि घोषणापत्र चाहे कितना भी छोटा क्यों न हो, एक आम वोटर उसे शायद ही पढ़ता है. ज़्यादातर जानकारी उसे टेलीविज़न, रेडियो और अख़बारों से मिल जाती है.
लेकिन फिर भी हर चुनाव की परंपरा है कि मैनिफ़ेस्टो प्रकाशित किए जाएँ.
माइकल हावर्ड ने अपने वादों को सरल रखा है—साफ़ हस्पताल, ज़्यादा पुलिसकर्मी, स्कूलों में अच्छा अनुशासन, नियंत्रित आप्रवासन और कम टैक्स. और साथ ही उन्होंने कहा है कि उनकी सरकार लोगों की क्षमताओं पर ज़्यादा भरोसा करेगी.
उन्होंने कहा कि हमें लोगों पर भरोसा करना होगा कि वो अपना पैसा बुद्धिमानी से खर्च कर सकते हैं और सरकार से बेहतर तरीके से खर्च कर सकते हैं. हमें डॉक्टरों और नर्सों पर भरोसा करना होगा कि वो सही फ़ैसले करेंगे. हमें शिक्षकों पर भरोसा करना होगा कि वो पढ़ाने का काम अच्छे से करेंगे.
लेबर पार्टी
वहीं सत्ताधारी लेबर पार्टी ने शिक्षा में सुधार को अर्थव्यवस्था की सफलता से जोड़ा. पार्टी ने शिक्षा और ट्रेनिंग दोनों पर काफ़ी ज़ोर देने का फ़ैसला किया है.
पार्टी के नेता टोनी ब्लेयर और वित्त मंत्री गार्डन ब्राउन दोनों ही इस घोषणा के समय साथ-साथ थे. ब्राउन ने कहा यदि ब्रिटेन को दूसरी अर्थव्यवस्थाओं से मुक़ाबला करना है तो उसका एकमात्र रास्ता है ट्रेनिंग और शिक्षा.
ब्लेयर ने कहा, "भविष्य के लिए ये निहायत ज़रूरी है कि हम युवाओं की क्षमता को पहचानें और उन्हें कार्यकुशल बनाएँ और इसलिए मेरा कहना है कि 18 साल तक के सभी युवा शिक्षित हों."
लिबरल डेमोक्रेट्स के वादों में शिक्षा को ही केंद्रबिंदु बनाया गया है. पार्टी के नेता चार्ल्स कैनेडी ने वादा किया है कि प्राइमरी स्कूलों में 21,000 शिक्षकों की नियुक्ति होगी. उन्होंने शिक्षकों पर से बाबूशाही का दबाव हटाने की भी बात की.
कैनेडी का कहना है कि वो शिक्षकों पर कागज़ी कार्रवाई और बाबूशाही का दबाव कम करेंगे जिससे कि वो अपने मुख्य काम—यानी छात्रों की देखरेख पर ज़्यादा ध्यान दे सकें.
तीनों पार्टियों की ये घोषणाएँ चार करोड़ चालीस लाख ब्रितानी वोटरों के लिए अगले कुछ हफ़्तों में बहस दिशा तय करेंगे. और वोटरों की रूचि इस बहस में बनाए रखना शायद नेताओं के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी.