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शनिवार, 09 अप्रैल, 2005 को 17:45 GMT तक के समाचार

इसराइली गोलीबारी में तीन की मौत

इसराइली सैनिकों ने ग़ज़ा पट्टी के पास एक शरणार्थी शिविर में तीन फ़लस्तीनी किशोरों को गोली मार दी है.

मौक़े पर मौजूद लोगों का कहना है कि ग़ज़ा पट्टी के दक्षिणी इलाक़े में एक शरणार्थी शिविर में इन किशोरों को उस समय मारा गया जब वे मिस्र की सीमा के निकट "निषिद्ध क्षेत्र" में पहुँच गई अपनी गेंद वापस लाने की कोशिश कर रहे थे.

इसराइली सेना ने कहा है कि घटना की जाँच की जा रही है.

फ़रवरी में इसराइल और फ़लस्तीनियों के बीच हुए युद्ध विराम समझौते के बाद यह अभी तक की सबसे गंभीर हिंसक घटना है.

फ़लस्तीनी प्रशासन ने इन किशोरों को मारे जाने की घटना को समझौते का "गंभीर उल्लंघन" क़रार दिया.

इस घटना के कुछ घंटों बाद फ़लस्तानियों ने ग़ज़ा में यहूदी बस्तियों पर मोर्टार दागे, हालाँकि उससे कोई हताहत नहीं हुआ.

चेतावनी

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब किशोरों ने सीमा के निकट निषिद्ध क्षेत्र में पहुँची अपनी गेंद वापस लेने की कोशिश की तो उन पर ताबड़तोड़ गोलियाँ बरस पड़ीं.

रफ़ाह के निवासी 22 वर्षीय अली अबू ज़ायब ने कहा, "किशोर गेंद लेने उसके पीछे भागे और तभी गोलियाँ चलने की आवाज़ सुनाई दी."

ख़बरों में कहा गया है कि मारे गए किशोरों में दो 14 से 15 साल की उम्र के थे.

ग़ज़ा में बीबीसी संवाददाता ऐलन जोन्स्टन का कहना है कि मिस्र की सीमा के निकट इस इलाक़े पर इसराइल का क़ब्ज़ा है और वहाँ भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात हैं.

बीबीसी संवाददाता ने इसराइली सेना के सूत्रों के हवाले से ख़बर दी है कि किशोर एक ऐसे इलाक़े में घुस गए थे जो फ़लस्तीनियों के लिए बिल्कुल बंद है.

इसराइली सैन्य सूत्रों ने कहा कि चेतावनी देने के लिए किए गए फ़ॉयर की अनदेखी की गई और उसके बाद ही किशोरों पर गोली चलाई गई.

उधर ग़ज़ा में चरमपंथी संगठन हमास के नेता सईद सियाम ने समाचार एजेंसी एपी से कहा कि इन किशोरों की मौत का बदला लिया जाएगा.

"फ़लस्तीनी लोग इस अपराध के सामने ख़ामोश नहीं बैठ सकते और इसके लिए सज़ा दी जाएगी."