गुरुवार, 24 मार्च, 2005 को 01:18 GMT तक के समाचार
ब्रिटेन की टोनी ब्लेयर सरकार पर अब दबाव है कि वह यह इस बात पर सफ़ाई दे कि इराक़ युद्ध शुरु होने से पहले महाधिवक्ता ने अपनी राय क्यों बदली थी.
कुछ दस्तावेज़ों के आधार पर ब्रिटेन के 'चैनल 4 न्यूज़' ने दावा किया है कि महाधिवक्ता ने पहले कहा था कि संयुक्त राष्ट्र की अनुमति के बिना इराक़ पर हमला ग़ैरक़ानूनी होगा.
उल्लेखनीय है कि बाद में महाधिवक्ता लॉर्ड गोल्डस्मिथ ने सरकार को इराक़ हमले के पक्ष में राय दी थी.
टेलीविज़न चैनल का दावा है कि उसके पास एक सरकारी वकील के इस्तीफ़े के अप्रकाशित हिस्सों की प्रति है जो इस तथ्य को उजागर करती है.
एलिज़ाबेथ विल्म्सहर्स्ट ब्रिटेन के विदेश विभाग में सहायक क़ाननी सलाहकार थे और उन्होंने इराक़ पर हमला शुरु होने से पहले इस्तीफ़ा दे दिया था.
सरकार ने उनके इस्तीफ़े के एक हिस्से को प्रकाशित करने से इंकार कर दिया था. लेकिन टेलीविज़न चैनल का दावा है कि उसके पास यह हिस्सा मौजूद है.
चैनल ने कहा है कि इसमें कहा गया है कि महाधिवक्ता ने क़ानूनी मामलों के एक दल के साथ इस बात पर सहमति जताई थी कि संयुक्त राष्ट्र में दूसरे प्रस्ताव के बिना इराक़ पर हमला करना 'ग़ैरक़ानूनी होगा'.
इस ख़बर पर महाधिवक्ता के कार्यालय ने कहा है कि लॉर्ड गोल्डस्मिथ ने उस समय इराक़ पर हमले को क़ानूनी ठहराया था और यह उनकी अपनी अपनी स्वतंत्र राय थी.
लेकिन अब विपक्षी दल सरकार पर यह दबाव डाल रहे हैं कि वह इस बात पर स्पष्टीकरण दे कि आख़िर महाधिवक्ता ने अपनी राय क्यों और कैसे बदली थी.