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रविवार, 20 मार्च, 2005 को 03:46 GMT तक के समाचार

गाँधी के नाम की सड़क बदनाम इलाक़े में

दक्षिण अफ़्रीका के डरबन में पिछले हफ़्ते एक सड़क का नाम महात्मा गाँधी के नाम पर रखने की घोषणा की गई.

लेकिन इस घोषणा का विरोध शुरु हो गया और अब अधिकारी इस फ़ैसले पर पुनर्विचार कर रहे हैं.

दरअसल जिस सड़क का नाम महात्मा गाँधी के नाम पर रखा गया है वह रेडलाइट इलाक़े में है यानी वेश्यावृत्ति के लिए बदनाम इलाक़े में.

उल्लेखनीय है कि गाँधी जी 20 साल डरबन में रहे थे और वहीं से उन्होंने ब्रितानी उपनिवेश के ख़िलाफ़ संघर्ष की शुरुआत की थी.

विरोध

आमतौर पर तो गाँधी की स्मृति में कोई नामकरण हो तो गाँधी के प्रशंसक खुश ही होते हैं लेकिन इस बार दक्षिण अफ़्रीकी प्रशासन के इस फ़ैसले का उल्टा ही असर हुआ.

यह स्वाभाविक भी था क्योंकि डरबन प्रशासन ने जिस सड़क का नाम महात्मा गाँधी के नाम पर रखने का फ़ैसला किया है वह वेश्यावृत्ति, अपराध और व्यसनी लोगों के लिए बदनाम इलाक़े में है.

समुद्री तट के पास बसे इस इलाक़े में वेश्वावृत्ति और नशीली दवाओं का कारोबार पिछले कुछ दशकों में बढ़ा है.

जब प्रशासन ने पॉइंट सड़क के नामकरण की घोषणा की तो वहाँ रह रहे दस लाख से भी ज़्यादा भारतीय मूल के लोगों ने विरोध जताया और कहा कि यह गाँधी जी का अपमान है.

लेकिन गाँधी जी की पौत्री और अफ़्रीकी नेशनल कांग्रेस की सांसद इला गाँधी भी इस फ़ैसले का विरोध कर रही हैं लेकिन उनके विरोध का कारण कुछ और है.

वे कहती हैं, "पॉइंट रोड एक छोटी सड़क है और महात्मा गाँधी जैसे अंतरराष्ट्रीय व्यक्तित्व के नाम पर यदि किसी सड़क का नाम रखना ही है तो बड़ी और महत्वपूर्ण सड़क का चुनाव किया जाना चाहिए."

इला गाँधी का कहना है कि प्रशासन ने इस फ़ैसले से पहले उनके परिवार से कोई विचार विमर्श नहीं किया था.

लेकिन वहाँ रहने वाले लोगों की प्रतिक्रिया मिली जुली है.

उस सड़क पर वेश्यावृत्ति करने वाली एक लड़की ने कहा, "परिवर्तन तो अच्छा ही होता है लेकिन मेरे लिए इसका कोई महत्व नहीं है."

लेकिन वहाँ रहने वाले एक व्यक्ति ने कहा, "यह जगह बदनाम है शायद गाँधीजी का नाम देने से इसकी छवि कुछ बदले."

सड़कों का नाम बदलने का फ़ैसला दक्षिण अफ़्रीकी प्रशासन की उस मुहीम का हिस्सा है जिसके तहत आज़ादी और मानवाधिकार की लड़ाई में भाग लेने वालों का सम्मान किया जा रहा है.

नगर प्रशासन ने इस सड़क का नाम महात्मा गाँधी के नाम पर रखने का फ़ैसला जनता से आए प्रस्तावों के बाद किया था.

इस सड़क पर हाल ही में लाखों की राशि खर्च की गई है.

सामाजिक मामलों के टीकाकार अश्विन देसाई कहते हैं, "पॉइंट सड़क को गाँधी का नाम देने के पहले इस सड़क पर जिस तरह से पुराने मकानों को हटाया गया है और बड़े भवन खड़े किए गए हैं वह अपने आपमें गाँधी का अपमान है."

विरोधों के बाद लगता है कि इस सड़क का नाम फिर बदल दिया जाएगा.