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बुधवार, 16 मार्च, 2005 को 19:31 GMT तक के समाचार

कनिष्क कांड के दोनों अभियुक्त बरी

कनाडा के एक न्यायाधीश ने 1985 में हुए एयर इंडिया विमान कनिष्क कांड के दोनों अभियुक्तों रिपुदमन सिंह और अजायब सिंह बागड़ी को निर्दोष क़रार है.

एयर इंडिया के विमान कनिष्क में उस समय एक भयंकर बम विस्फोट हुआ था जब वह अटलांटिक महासागर के ऊपर से गुज़र रहा था.

23 जून 1985 को हुई इस घटना में विमान में सवार सभी 329 लोगों की मौत हो गई थी.

11 सितंबर 2001 को अमरीका पर हुए हमलों से पहले तक कनिष्क विमान धमाका विमानन इतिहास में सबसे भयंकर चरमपंथी हमला था.

एयर इंडिया की उड़ान संख्या 182 कनाडा से भारत जा रही थी और वह टोरंटो से उड़ान भरकर मांट्रियाल में भी कुछ देर के लिए रुकी थी.

जिस समय उसमें बम विस्फोट हुआ, तब वह लंदन के हीथ्रो हवाई अड्डे से क़रीब 45 मिनट की दूरी पर था.

कनिष्क विमान ब्रितानी समय के मुताबिक सुबह आठ बजकर 16 मिनट पर अचानक राडार से ग़ायब हो गया था और विस्फोट के बाद विमान का मलबा आयरलैंड के तटवर्ती इलाक़े में बिखर गया था.

विमान में ज़्यादातर भारतीय मूल के यात्री थे जो मुंबई या दिल्ली जा रहे थे.

लंबी सुनवाई

न्यायाधीश ने बुधवार को कहा कि अभियोजन पक्ष ऐसे सबूत पेश नहीं कर सका है जिससे रिपुदमन सिंह या बागड़ी को दोषी ठहराया जा सके.

मामले की सुनवाई वैंकूवर में हो रही है जहाँ ऐसे कई लोग हैं जिनके संबंधी इस बम कांड में मारे गए थे.

कनाडा के क़ानूनी इतिहास में यह अत्यंत पेचीदा और लंबा मामला रहा है.

अभियोजन पक्ष को सबूत पेश करने में 13 से अधिक महीने लगे जबकि मामले की जाँच 15 साल से अधिक समय तक चली.

वैंकूवर में बीबीसी संवाददाता इयान गुन का कहना है कि इस मुक़दमे की सुनवाई के दौरान कई सबूत तो गुम हो गए और दो महत्वपूर्ण गवाहों की हत्या हो गई.

वैंकूवर की आरा मिल में काम करने वाले अजायब सिंह बागड़ी और व्यवसायी रिपुदमन सिंह को वर्ष 2000 में गिरफ्तार किया गया था और उन पर हत्या के आरोप लगाए गए थे.

दोनों व्यक्तियों ने इन आरोपों का खंडन किया था.

कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया के सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश इयान ब्रूस जोसेफसन ने अपना फैसला सुनाने में तीन महीने का समय लिया. उन्होंने यह फैसला बिना ज्यूरी गठित किए दिया है.

अभियोजन पक्ष का आरोप था कि इन दोनों व्यक्तियों ने एयर इंडिया के विमान-कनिष्क में बम रखने में मदद की थी.

अभियोजन पक्ष के अनुसार इन दोनों ने 1984 में सिखों के धार्मिक स्थल अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में पुलिस कार्रवाई का बदला लेने के लिए एयर इंडिया के विमान में बम रखा था.