http://www.bbcchindi.com

सोमवार, 14 मार्च, 2005 को 17:20 GMT तक के समाचार

लेबनान में 'रिकार्ड प्रदर्शन'

लेबनान की राजधानी बेरुत में सीरिया के सैनिकों की मौजूदगी के ख़िलाफ़ विपक्ष की एक रैली में कम से कम दस लाख लोगों ने हिस्सा लिया है.

पूर्व प्रधानमंत्री रफ़ीक हरिरी की एक कार बम हमले में हुई हत्या के ठीक एक महीने बाद इस रैली का आयोजन किया गया है.

रैली में हिस्सा ले रहे लोग लेबनान में सीरियाई सैनिकों की मौजूदगी का विरोध कर रहे हैं.

बेरुत में बीबीसी संवाददाता किम घटास का कहना है कि प्रदर्शकारियों ने पूरे शहर को लाल सफेद और हरे रंगों से भर दिया है जो लेबनान के राष्ट्रीय झंडे का रंग है.

सीरिया ने कुछ दिन पहले अपने कुछ सैनिकों को बेरुत से हटाकर दूसरे स्थानों पर नियुक्त किया था.

इसके अलावा सीरिया ने संयुक्त राष्ट्र से वादा भी किया है कि वो आने वाले दिनों में अपने सभी 14000 सैनिकों और गुप्तचर एजेंटों को लेबनान से पूरी तरह हटा लेगा.

सीरिया के इस क़दम का अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलीसा राइस ने सावधानीपूर्वक स्वागत करते हुए कहा है कि यह एक सकारात्मक क़दम है.

प्रदर्शन में हिस्सेदारी

प्रदर्शन शाम को होना था लेकिन हज़ारों प्रदर्शनकारी सुबह से ही बसों और कारों में सवार होकर या पैदल ही बेरूत पहुँचने लगे थे.

इसके लिए लोगों को एकजुट करने के लिए मारे गए पूर्व प्रधानमंत्री रफ़ीक़ हरीरी के निजी टेलीविज़न ने बाक़ायदा अभियान चलाया था.

अख़बारों, टेलीविज़न और रेडियो के ज़रिए लोगों से कहा गया कि वो बिना डरे आगे आएँ और विरोध प्रदर्शित करें.

पहले आयोजित किए गए प्रदर्शनों में लेबनन के सभी धार्मिक समुदायों की भागीदारी हुआ करती थी, लेकिन इस बार सुन्नियों ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया.

विपक्ष के इस धुँआधार प्रदर्शन से प्रेरित होकर लेबनन के पूर्व प्रधानमंत्री जनरल माइकल आऊन ने भी कहा है कि आने वाले चुनावों से पहले वो निर्वासन से लौटकर लेबनन पहुँचेंगे.

उन्होंने कहा "आने वाले हफ़्तों में मंत्री इसाम अबू जामरा और एडगर मालऊफ़ के साथ मैं लौटूँगा. हम संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान की इस घोषणा का इंतज़ार कर रहे हैं कि सीरियाई सेनाएँ और ख़ुफ़िया तंत्र कब लेबनान से हटेगा."

प्रदर्शन में हिस्सा ले रहे लोगों ने अपने हाथों में लाल और सफ़ेद रंग से झंडे उठा रखे थे और शहर बेरूत का मुख्य हिस्सा इन्हीं रंगों में नहा उठा.

लोग रफ़ीक़ हरीरी की हत्या की सचाई जानना चाहते थे और सीरियाई फ़ौजों को हटाए जाने की माँग कर रहे थे.

ऐसा लगता है कि विपक्ष इस माहौल को बनाए रखना चाहता है और मई में होने वाले चुनावों में इसका फ़ायदा उठाना चाहता है.