सीरिया और लेबनान ने तय किया है कि इस महीने के अंत तक सीरियाई सैनिक लेबनान की बेका घाटी तक पीछे हट जाएँगे.
दमिश्क में सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल असद और लेबनान के राष्ट्रपति एमिल लाहूद की बैठक में ये तय हुआ है.
अमरीका दोनो पक्षों के इस फ़ैसले से ख़ुश नहीं है. अमरीका का कहना है कि सीरियाई सैनिकों की वापसी पर तत्काल कदम उठाए जाने चाहिए.
अमरीकी राष्ट्रपति के कार्यालय के एक प्रवक्ता का कहना है कि सीरिया की योजना में आधे-अधूरे कदम सुझाए गए हैं.
ये भी कहा गया है कि इससे न तो लेबनान की माँग पुरी होगी और न ही अंतरराष्ट्रीय संमुदाय की.
अमरीकी राष्ट्रपति कार्यालय ने सीरिया के 14 हज़ार सैनिकों और गुप्तचर विभाग के अधिकारियों को तत्काल लेबनान से हटाए जाने की माँग दोहराई है.
फ़्रांस और जर्मनी ने भी ऐसी ही माँग रखी है.
बेरूत में हज़ारों सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों ने फिर प्रदर्शन कर माँग रखी है कि सीरिया लेबनान के मामलों में दख़ल बंद करे.
सोमवार से शुरुआत
सीरिया लेबनान में लंबे समय से मौजूद अपने सैनिकों को सोमवार से पीछे हटाना शुरू कर रहा है.
इसके बाद दोनो देशों के सैनिक अधिकारी एक महीने में फ़ैसला करेंगे की ये फ़ौजें बेका घाटी में कब तक रहेंगी.
इसके बाद सेना पूरी तरह से हटाने के बारे में बातचीत से निर्णय लिया जाएगा.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि दोनो नेताओं के बयान से ये स्पष्ट नहीं हुआ है कि सीरिया के सैनिक पूरी तरह हटाए जाएँगे या नहीं.
कई हफ्तों के अंतरराष्ट्रीय दबाव और लेबनानी नागरिकों के प्रदर्शन के बाद सीरिया के सैनिकों की लेबनान से पीछे हटने की घोषणा शनिवार को की गई थी.
इस घोषणा के बाद अरब देशों ने लेबनान से सीरियाई सैनिक हटाए जाने का स्वागत किया था.
लेकिन अमरीकी विदेश मंत्रालय ने तब भी कहा था कि लेबनान से विदेशी सैनिकों की वापसी के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने पिछले वर्ष जो प्रस्ताव तैयार किया था उसकी सारी बातों को नहीं माना गया.
उधर लेबनान के विपक्षी नेताओं ने कहा है कि लेबनान में मई में होने वाले चुनाव से पहले ये आवश्यक है कि सीरियाई सैनिक पूरी तरह से लेबनान से वापस चले जाएँ.
वहीं लेबनान में सीरिया समर्थक हिज़्बुल्ला छापामारों ने सीरिया के फ़ौज हटाने की घोषणा को लेबनान में विदेशी हस्तक्षेप बताते हुए इसकी आलोचना की है.