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शुक्रवार, 11 फ़रवरी, 2005 को 21:56 GMT तक के समाचार

प्रसिद्ध नाटककार आर्थर मिलर का निधन

बीसवीं शताब्दी के प्रमुख नाटककार और लेखक आर्थर मिलर का 89 वर्ष की आयु में निधन हो गया है.

वे कैंसर और दिल के रोग से ग्रस्त थे.

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सामाजिक विषयों पर नाटक लिखने वाले मिलर ने बहुचर्चित 'द अमेरिकन ड्रीम' यानि 'सपनों के अमरीका' की कई ख़ामियाँ अमरीकी जनता और विश्व के सामने रखीं.

इसी कारण कई हलकों में उनकी आलोचना भी हुई लेकिन उसकी परवाह किए बिना उन्होंने अपने नाटकों में आधुनिक समाज पर अपना नज़रिया रखा.

'डेथ ऑफ़ ए सेल्समैन'

जब न्यूयॉर्क में 1949 में उनके नाटक 'डेथ ऑफ़ ए सेल्समैन' (एक सेल्समैन की मौत) का मंचन हुआ तो वे रातों-रात ही लोकप्रिय हो गए.

ये कहानी थी विली लोमैन की, एक आम व्यक्ति जिसका अमरीका के पूँजीवाद में पूरा विश्वास है और जो व्यवसायिक सफलता के लिए काम करते हुए, भारी दवावों से घिरा हुआ, दम तोड़ देता है.

इसी नाटक के लिए उन्हें 1949 में पुलिट्ज़र पुरस्कार भी मिला.

मिलर की ये योग्यता थी कि वे बिलकुल निजी या व्यक्तिगत कहानियों को भी व्यापक सामाजिक स्वरूप प्रदान कर देते थे.

उदारवादी विचार

उनका जन्म न्यूयॉर्क में 1915 में एक कपड़ा मिल के मालक के घर में हुआ. लेकिन अमरीका में 1929 में आर्थिक संकट और शेयर बाज़ार में भारी गिरावट से उनके पिता का कारोबार ठप्प हो गया.

उन्होंने छोटे-मोटे काम करते हुए कॉलेज की पढ़ाई की और पत्रकारिता पढ़ी.

उनका पहला नाटक - 'ऑल माए सन्स' में अमरीका के द्वितीय विश्व युद्ध में भाग लेने से एक अमरीकी परिवार पर हुए असर का वर्णन है.

उनकी इस पर कड़ी आलोचना हुई और उन पर देशभक्ती के अभाव का आरोप भी लगा.

लेकिन उनका यही कहना था कि वे तो केवल सच बयान कर रहे थे.

अपने उदारवादी विचारों के कारण जब अमरीका में कम्युनिस्ट समर्थकों के ख़िलाफ़ मैक्कार्थी दौर में अभियान चलाया गया तो वे फिर विवादों में घिर गए.

एक संसदीय समिति के सामने उन्होंने अपने उन दोस्तों और सहयोगियों के नाम बताने से इनकार कर दिया जो कम्युनिस्ट रहे थे.

उनका कहना था, "मैं नहीं मानता कि अमरीका में अपने व्यवसाय का पालन करते हुए किसी व्यक्ति को मुख़बिर बनने की ज़रूरत है."

इस विषय से जुड़े हुए एक विषय - न्यू इंग्लैंड के मुकदमों पर उन्होंने नाटक लिखा 'द क्रुसिबल' जिसमें ऐसे सामूहिक रोष और अभियान का अध्ययन किया गया.

मर्लिन मनरो से ब्याह

दिलचस्प बात ये है कि उनकी शादी 1956 में मशहूर अदाकारा मर्लिन मनरो से हुई लेकिन पाँच साल बाद ही तलाक़ भी हो गया.

चाहे अमरीका में बाद में उनके काम में दिलचस्पी घटी लेकिन ब्रिटेन में उनके काम को हमेशा सराहा गया और 1995 में भी उनके 'ब्रोकन ग्लास' (टूटा हुआ शीशा) को प्रतिष्ठित ओलिवियर अवार्ड मिला.

उनका काम दुनिया भर में इतना सराहा गया कि माना जाता है कि पूरे विश्व में हर रोज़ कहीं न कहीं उनके किसी न किसी नाटक का मंचन हो रहा होता है.