मंगलवार, 08 फ़रवरी, 2005 को 23:01 GMT तक के समाचार
अमरीकी खुफिया एजेंसी (सीआईए) के एक पूर्व अधिकारी ने माना है कि मध्य पूर्व के कई देशों में आतंकवादी गतिविधियों में लगे होने के संदेह में कई लोगों को जेलों में रखा जा रहा है और उन्हें प्रताड़ित करना आम बात है.
22 साल तक सीआईए से जुड़े रहे माइकल श्कुअर ने पिछले नवंबर में संस्था छोड़ी है. ओसामा बिन लादेन की तलाश करने वाली टीम के प्रमुख रहे श्कुअर का कहना है कि अमरीकि सैनिकों द्वारा संदिग्धों को प्रताड़ित करना रणनीति का हिस्सा है.
श्कुअर के अनुसार इन जेलों में उन देशों तक का क़ानून नहीं चलता जहां ये जेलें बनी हुई हैं.
बीबीसी के फाइल ऑन 4 कार्यक्रम में श्कुअर ने कहा " होता ये है कि किसी को भी सड़क से पकड़ा जा सकता है अगर वो किसी भी तरह की आतंकवादी गतिविधि से जुड़ा हुआ हो. "
श्कुअर का कहना है कि इस नीति को सीआईए के उच्च स्तरीय अधिकारियों और व्हाइट का वरदहस्त है और वकीलों ने भी इसकी अनुमति दे रखी है.
श्कुअर के अनुसार लोगों को पकड़ कर दूसरे या तीसरे देशों की जेलों में इसलिए भेज दिया जाता है कि क्योंकि इन देशों की कार्यपालिका ने अपने देशों में आतंकवादी नेटवर्क को समाप्त करने का काम सीआईए को सौंप रखा है.
संयुक्त राष्ट्र के नियम
सीआईए के पूर्व अधिकारी का मानना है कि कुछ संदिग्ध लोगों को मिस्र जैसे देशों में भेज दिया जाता है जहां पूरी संभावना है कि उन्हें प्रताड़ित किया जाता हो.
हालांकि उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि प्रताड़ित करने का काम अमरीकी ही करते हैं और इस संबंध में ह़ॉलीवुड में जितना दिखाया जाता है वो भी सही नहीं है.
उन्होंने कहा " मानवाधिकार एक लचीली अवधारणा है. यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप किसी निर्धारित दिन कितना ढोंग करना चाहते हैं. "
वैसे प्रताड़ना के ख़िलाफ संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार सम्मेलन के अनुसार किसी भी देश के व्यक्ति को गिरफ्तार कर दूसरे या तीसरे देश में ( जहां उन्हें प्रताड़ित किए जाने की संभावना हो) नहीं भेजा जा सकता है.
श्कुअर सीआईए के दूसरे व्यक्ति हैं जिन्होंने ये माना है कि अमरीका संदिग्ध लोगों को न केवल ग्वांतानामो बे भेजता है बल्कि जार्डन, सीरिया और मिस्र की जेलों में भी भेजता है.
कैदी की ज़ुबानी
कनाडा के एक व्यक्ति माहेर अरार को सन् 2000 में अमरीकी अधिकारियों ने गिरफ्तार कर सीरिया की जेल में भेज दिया था.
एक साल बाद अरार ने वापस लौट कर बताया कि उन्हें बुरी तरह प्रताड़ित किया जाता था और उन जेलों में उस जैसे कई और कैदी थे.
इसी तरह ऑस्ट्रेलिया के एक नागरिक मामदो हबीब को अमरीकी अधिकारियों ने पाकिस्तान में गिरफ्तार कर मिस्र भेज दिया. उन पर आतंकवादि गतिविधियों में लिप्त होने का शक था.
हबीब को बुरी तरह प्रताडित किया जाता था और बिजली के झटके तक दिए जाते थे.
बाद में उन्हें ग्वांतानामो बे भेजा गया जहां से पिछले महीने उन्हें रिहा कर दिया गया.
अमरीकी रक्षा विभाग लगातार ये कहता रहा है कि वो प्रताडित करने की नीति की आलोचना करते हैं और ग्वांतानामो बे में किसी को प्रताड़ित नहीं किया जाता बल्कि वैसा ही व्यवहार होता है जैसा दुश्मन सैनिक के साथ होना चाहिए.