सोमवार, 07 फ़रवरी, 2005 को 21:39 GMT तक के समाचार
ऐसी ख़बरें हैं कि फ़लस्तीनी और इसराइली नेता मंगलवार को संघर्ष विराम पर राज़ी हो सकते हैं.
सूत्रों का कहना है कि मंगलवार को जब मिस्र में फ़लस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास और इसराइली प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन की मुलाक़ात होगी तो इस समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे.
फ़लस्तीनी वार्ताकार साएब एराकात ने कहा कि शर्म अल शेख़ शिखर सम्मेलन ने बाद संघर्ष विराम लागू हो सकता है.
दोनों पक्षों के बीच सन् 2000 के बाद यह पहली सबसे उच्च स्तरीय बैठक होगी. एक इस्राइली अधिकारी ने नाम उजागर न करने की शर्त पर इस ख़बर की पुष्टि की है.
रायटर्स समाचार एजेंसी के अनुसर एराकात ने कहा, " इस बैठक में सबसे महत्वपूर्ण बात यही होगी कि दोनों पक्ष एक दूसरे के ख़िलाफ़ हिंसा बंद करने की घोषणा पर राज़ी हो जाएंगे."
उन्होंने कहा कि इस समझौते के बाद संयुक्त समितियों का गठन होगा जो इसराइली जेलों से फ़लस्तीनी क़ैदियों की रिहाई और फ़लस्तीनी इलाक़ों से इसराइली सेना की वापसी का काम देखेगा.
एक इसराइली अधिकारी संघर्ष विराम संबंधी ख़बर की पुष्टि की लेकिन कहा कि इसके बाक़ी विवरणों पर विचार किया जा रहा है.
शर्म अल शेख़ में मंगलवार से हो रही बैठक में इसराइली और फ़लस्तीनी अधिकारियों के अलावा जार्डन के शाह अब्दुल्ला और मिस्र के राष्ट्रपति होस्नी मुबारक भी शिरकत कर रहे हैं.
अमरीकी भूमिका
उधर अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस इस समय मध्य पूर्व के दौरे पर हैं और उन्होंने शेरॉन और अब्बास दोनों से मुलाक़ात की है.
सोमवार को फ़लस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास से मुलाक़ात के बाद उन्होंने मध्य पूर्व में सुरक्षा दूत की नियुक्ति की घोषणा की थी.
इससे पहले राइस ने फ़लस्तीनी राष्ट्र के गठन पर जोर दिया था और कहा था कि इसराइल को कड़े फ़ैसले करने के लिए तैयार रहना चाहिए.
फ़लस्तीन के वरिष्ठ नेता यासिर अराफ़ात के निधन के बाद अब्बास फ़लस्तीनी सत्ता संभाली है.
इसराइली ठिकानों पर चरमपंथी रोकने के अब्बास के प्रयासों की इसराइल ने तारीफ़ भी की है.
अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने सोमवार को कहा था कि अब्बास का शासन विश्वास करने योग्य है.