सोमवार, 31 जनवरी, 2005 को 13:28 GMT तक के समाचार
इराक़ के अंतरिम प्रधानमंत्री ईयाद अलावी ने कहा है कि कई दशकों के बाद हुए पहले लोकतांत्रिक चुनाव ने चरमपंथियों को ये दिखा दिया है कि वे जीत नहीं सकते.
उनका कहना था कि इराक़ अपने इतिहास के एक नए दौर में है और इराक़ियों को अपने पुराने मतभेद भुलाकर मिलकर काम करना चाहिए.
अंतरिम प्रधानमंत्री अलावी का कहना था कि वे राष्ट्रीय स्तर पर इस विषय पर चर्चा करेंगे कि नई सरकार में सभी इराक़ियों को प्रतिनिधित्व मिले.
इराक़ी अधिकारियों के अनुसार मतदान में लगभग साठ प्रतिशत लोगों ने भाग लिया.
उधर इराक़ के बाहर अधिकतर जगह पर इस मतदान पर को सराहा गया है.
दुनिया के अधिकतर देशों ने जहाँ इराक़ चुनाव को लोकतंत्र की ओर उठाया महत्वपूर्ण कदम बताया है वहीं चीन ने अफ़सोस जताया है.
इराक़ के आंतरिक मामलों के मंत्री फ़लाह अल-नक़ीब ने कहा है कि मतदान के दौरान 200 संदिग्ध विद्रोहियों को हिरासत में लिया गया और मतदान केंद्रों पर 38 हमले हुए और तीस आम नागरिक और चार विद्रोही मारे गए.
सकारात्मक प्रतिक्रिया
चीन की आधिकारिक समाचार एजेंसी का कहना है कि चुनाव पर हिंसा का धब्बा लगा हुआ है और इराक़ में स्थिति अब भी गंभीर है.
लेकिन ईरान ने इसे एक बहुत महत्वपूर्म कदम बताया है.
जॉर्डन ने उम्मीद जताई है कि चुनाव के बाद इराक़ में स्थिरता आएगी और चुनाव जनता की प्राथमिकताओं को दर्शाएगा.
फ़्रांस और जर्मनी, दोनो ने इराक़ पर युद्ध का विरोध किया था लेकिन दोनो ही देशों ने कहा है कि इराक़ को लोकतंत्र की ओर ले जाने में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है.
अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश और ब्रितानी प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर पहले ही इसे अत्यंत सफल चुनाव की संज्ञा दे चुके हैं.
राष्ट्रपति बुश ने इराक़ी जनता को बधाई दी और उनकी हिम्मत की सराहना की और कहा कि धमकियों के बावजूद लोगों ने मतदान में हिस्सा लिया.
बुश ने कहा, "आज इराक़ी जनता ने दुनिया से बात की है. दुनिया मध्य पूर्व के केंद्र से आज़ादी की आवाज़ सुन रही है." उन्होंने कहा कि इराक़ी जनता ने लोकतंत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता ज़ाहिर कर दी है.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि अमरीकी राष्ट्रपति के कार्यालय में - 'हम सही थे' - का माहौल है.
मतगणना
इराक़ में रविवार को हुए चुनाव में जटिल और लंबी मतगणना जारी है और सारे परिणाम आने में क़रीब दो हफ़्ते का वक़्त लग सकता है.
क़रीब ढाई करोड़ की आबादी वाले इराक़ में जिन लोगों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने के लिए पंजीकरण कराया उनमें से लगभग अस्सी लाख लोगों ने मतदान में भाग लिया.
लेकिन कुछ सुन्नी बहुल इलाक़ों में, जहाँ अमरीकी सेना के ख़िलाफ़ विद्रोह देखा गया, कई मतदान केंद्रों में लोग नज़र नहीं आए.
अब चुने गए उम्मीदवार नए राष्ट्रपति का चुनाव करेंगे और वे अंतरिम प्रधानमंत्री और सरकार की नियुक्ति करेंगे.
कुछ स्थानों पर बिजली नहीं होने की वजह से मतगणना मोमबत्तियों की रौशनी में हो रही है.
अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों के दल के मुखिया ज्याँ पियर किंग्सली ने कहा कि चुनाव मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरे उतरे हैं हालाँकि क़ानून और व्यवस्था की स्थिति के कुछ पहलुओं में सुधार की ज़रूरत है.
मतदान के दौरान पर्यवेक्षकों का दल जॉर्डन में मौजूद था.
संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान ने कहा है कि इराक़ी लोगों को अपने भविष्य का नियंत्रण अपने हाथों में लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए.