रविवार, 30 जनवरी, 2005 को 18:06 GMT तक के समाचार
अमरीका और ब्रिटेन ने इराक़ में हुए चुनाव को पूरी तरह सफल बताया है. इराक़ी निर्वाचन आयोग का दावा है कि उम्मीद से अधिक लोगों ने मतदान किया.
अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने इराक़ी चुनाव को सफल बताया और कहा कि इराक़ी जनता ने 'आतंकवादियों' की मंशा को ख़ारिज कर दिया है.
राष्ट्रपति बुश ने इराक़ी जनता को बधाई दी और उनकी हिम्मत की सराहना की और कहा कि धमकियों के बावजूद लोगों ने मतदान में हिस्सा लिया.
बुश ने कहा, "आज इराक़ी जनता ने दुनिया से बात की है. दुनिया मध्य पूर्व के केंद्र से आज़ादी की आवाज़ सुन रही है." उन्होंने कहा कि इराक़ी जनता ने लोकतंत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता ज़ाहिर कर दी है.
संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान ने कहा है कि इराक़ी लोगों को अपने भविष्य का नियंत्रण अपने हाथों में लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए.
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने कहा है कि इराक़ी चुनाव 'दुनिया भर के आतंकवाद' पर चोट है. उन्होंने कहा कि हथियार के बल पर सद्दाम हुसैन को ज़रूर सत्ताच्युत किया गया था लेकिन अब चुनाव ने आज़ादी की शक्ति को प्रदर्शित कर दिया है.
दूसरी ओर इराक़ी निर्वाचन आयोग ने दावा किया है कि उम्मीद से ज़्यादा लोगों ने मतदान में हिस्सा लिया. 50 साल बाद हुए पहले बहुदलीय चुनाव में कई हिंसक घटनाएँ भी हुईं.
अमरीका की विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस और संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान ने कहा है कि इराक़ ने लोकतंत्र की दिशा में महत्वपूर्ण क़दम बढ़ाया है.
लेकिन मतदान के बीच जगह-जगह हिंसक घटनाएँ भी हुईं जिनमें 30 से ज़्यादा लोग मारे गए. चरमपंथी नेता अबू मुसाब ज़रक़ावी ने कुछ घटनाओं की ज़िम्मेदारी ली है.
बीबीसी संवाददाताओं का कहना है कि देश के सुन्नी, शिया और कुर्द इलाक़ों में मतदान का अंतर स्पष्ट झलक रहा था.
देश के दक्षिणी शिया और उत्तरी कुर्द इलाक़ों में मतदान केंद्रों के बाहर लोगों की लंबी क़तारें लगी हुई थी तो सुन्नी बहुल इलाक़े ख़ाली नज़र आ रहे थे.
समय
इराक़ में मतदान स्थानीय समय के अनुसार पाँच बजे ख़त्म होना था लेकिन लोगों की लंबी क़तारों को देखते हुए समय बढ़ा दिया गया.
इराक़ी निर्वाचन अधिकारियों का आकलन है कि क़रीब 80 लाख तक इराक़ी लोगों ने मतदान में हिस्सा लिया. ये आँकड़ा पंजीकृत मतदाओं का 60 फ़ीसदी तक पहुँचता है.
इससे पहले संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष निर्वाचन सलाहकार कार्लोस वेलेनज़ुएला ने कहा था कि मतदान कई हिस्सों में ज़्यादा हुआ है लेकिन आँकड़ा बताना जल्दबाज़ी होगी.
बीबीसी संवाददाता पॉल वुड का कहना है कि अब इराक़ में यह सवाल उठ रहा है कि कितने सुन्नी मुसलमानों ने मतदान में हिस्सा लिया और क्या सरकार सही मायने में सभी इराक़ियों की सरकार होगी.
अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस ने भी माना है कि इराक़ के लिए मुश्किल भरे दिन अभी ख़त्म नहीं हुए हैं.
275 सदस्यों वाली नेशनल एसेंबली के लिए हुए मतदान में 200 से ज़्यादा राजनीतिक पार्टियों और गठबंधनों ने हिस्सा लिया.
हालाँकि यह एसेंबली भी अंतरिम होगी जिसका काम होगा पूर्णकालिक संसद के चुनाव से पहले नए इराक़ी संविधान को तैयार करना.
विभाजित देश
देश के दक्षिणी और उत्तरी इलाक़ों में मतदान के लिए लोगों में उत्साह था. कुछ मतदाताओं ने इसे अपने जीवन का सबसे महत्वपूर्ण दिन बताया.
लेकिन फ़लूजा, समारा और रमादी जैसे सुन्नी बहुल इलाक़ों में कई मतदान केंद्र बंद पड़े थे और मतदाता घरों से बाहर नहीं निकले.
बीबीसी संवाददाताओं का कहना है कि शायद चरमपंथियों की धमकी के कारण कुछ लोगों ने घर से निकलना बेहतर नहीं समझा तो कुछ लोगों ने मतदान के बहिष्कार का समर्थन किया.
मतदान के लिए इराक़ में अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था की गई थी. कई इलाक़ों में कर्फ़्यू जैसी स्थिति थी तो कई इलाक़ों में यातायात को सीमित कर दिया गया था.
इराक़ की ज़मीनी सीमा तो तीन दिनों के लिए पहले से ही बंद थी. लेकिन इसके बावजूद इराक़ में कई जगह हिंसा की घटनाएँ हुईं.
राजधानी बग़दाद में नौ आत्मघाती बम हमलों के साथ-साथ मोर्टार से गोले भी दाग़े गए. एक वेबसाइट पर जारी अपने बयान में अबु मूसाब ज़रक़ावी ने कुछ हमलों की ज़िम्मेदारी ली है.