मंगलवार, 25 जनवरी, 2005 को 02:07 GMT तक के समाचार
एक प्रमुख अमरीकी मानवाधिकार संगठन का कहना है कि इराक़ी सैनिक क़ैदियों से बड़े पैमाने पर दुर्व्यवहार कर रहे हैं.
ह्यूमन राइट्स वाच का कहना है कि ग़ैर क़ानूनी तरीक़े से गिरफ्तारी, यातनाएँ देना और क़ैदियों को लंबे समय तक अकेले बंद रखना रोज़मर्रा की बात है, और तो और कैदियों में बच्चे भी शामिल हैं.
ह्यूमन राइट्स वाच ने 2003 से लेकर अब तक जिन 90 क़ैदियों से बातचीत की है उनमें से 72 का कहना है कि नए इराक़ी प्रशासन ने उन पर अत्याचार किए.
ह्यूमन राइट्स वाच का कहना है कि इराक़ी सैनिकों को विद्रोही लगातार निशाना बनाते रहे हैं लेकिन इससे उन्हें यह हक़ नहीं मिल जाता कि वे कैदियों के साथ बुरा व्यवहार करें.
संगठन की कार्यकारी निदेशक सारा ली विट्सन का कहना है कि "इराक़ी सैनिक और उनके विदेशी सलाहकार देश में स्थायित्व लाने के नाम पर अत्याचारों की अनदेखी कर रहे हैं."
उनका कहना है कि सद्दाम हुसैन की सरकार को हटाए जाने के बाद इराक़ की जनता से इस तरह की स्थिति का तो वादा नहीं किया गया था.
सारा ने कहा, "इराक़ी अंतरिम प्रशासन मानवाधिकारों का सम्मान करने का अपना वादा पूरा नहीं कर रहा है, दुख की बात है कि इराक़ में क़ैदियों के साथ दुर्व्यवहार करने वालों को कभी सज़ा नहीं मिलती."
रिपोर्ट
संगठन की 94 पन्ने की रिपोर्ट में कहा गया है कि क़ैदियों को नियमित रूप से लोहे की छड़ों और तारों से पीटा जाता है, उनकी आँखों पर कई-कई दिनों तक पट्टियाँ बँधी होती हैं और उन्हें पूछताछ के दौरान बिजली के झटके भी दिए जाते हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक़, क़ैदियों को बहुत छोटे कमरों में कई दिनों तक रखा जाता है जहाँ सिर्फ़ खड़े होने भर की जगह होती है, उन्हें लंबे समय तक खाना-पानी भी नहीं दिया जाता.
न्यूयॉर्क स्थित इस संगठन का कहना है कि इस तरह के अत्याचार की वजह से कई कैदी ज़िंदगी भर के लिए अपाहिज हो जाते हैं.
'नया इराक़?' नाम से जारी इस रिपोर्ट में 2004 के मध्य से लेकर अब तक राजनीतिक पार्टियों के सदस्यों के प्रति इराक़ी ख़ुफ़िया सेवा के दुर्व्यवहार का भी ज़िक्र है.
जुलाई से अक्तूबर 2004 के बीच ह्यूमन राइट्स वाच ने जिन मामलों की जाँच की उनमें पाया गया कि लोगों के साथ मनमाना सुलूक किया गया और उन्हें वकील तक जाने का मौक़ा भी नहीं दिया गया.
सारा ली विट्सन का कहना है कि उनका संगठन विद्रोहियों की क्रूरता की भी कड़े शब्दों में आलोचना करता है लेकिन सुरक्षा के नाम पर कैदियों को दी जाने वाली यातना को किसी तरह से सही नहीं ठहराया जा सकता.
इस रिपोर्ट में सिर्फ़ इराक़ी सुरक्षा बलों के कथित अत्याचारों की जाँच की गई है, अमरीकी सैनिकों या गठबंधन सेना का इसमें ज़िक्र नहीं है.