सोमवार, 24 जनवरी, 2005 को 02:03 GMT तक के समाचार
अमरीकी सेना इराक़ में अपने सैनिकों को पैदा हुए ख़तरे का मुक़ाबला करने के लिए अब रोबोट सैनिक भेजने की योजना बना रही है.
ये रोबोट सैनिक मशीन गनों और कैमरों से लैस होंगे और इन्हें रिमोट कंट्रोल के ज़रिए चलाया जाएगा.
संवाद समित एपी के अनुसार ये रोबोट एक मीटर बड़े होंगे और इनमें कैमरे और मशीन गन लगे होंगे जिनके ज़रिए ये अपना निशाना साध सकेंगे.
अमरीकी सेना पिछले कुछ समय से बमों को निष्क्रिय करने के लिए रोबोटनुमा मशीनों का इस्तेमाल कर रही है.
अधिकारियों का कहना है कि रोबोट सैनिक अत्यंत तेज़, सटीक और हमला करने में सक्षम हैं.
अमरीकी अधिकारियों का ख़याल है कि रोबोट सैनिकों के इस्तेमाल से इनसान सैनिकों की जानें बचाई जा सकेंगी.
इतना ही नहीं रोबोट सैनिकों को भोजन, पानी, कपड़े-लत्ते, ट्रेनिंग, पेंशन या प्रेरणा किसी भी चीज़ की ज़रुरत नहीं होती. उन्हें चाहिए - गोलियाँ और निशाने और रिमोट का प्रयोग.
और ज़ाहिर है कि युद्ध ख़त्म होने पर इन रोबोट सैनिकों को गोदामों में रखा जा सकता है.
हालाँकि इन रोबोट सैनिकों की क्षमता निर्भर करेगी उन्हें नियंत्रित करने वाले सैनिकों पर जो उन्हें रिमोट के ज़रिए गोली चलाने का हुक्म देंगे.
सेना के साथ मिलकर इस तरह के रोबोट तैयार करने वाली कंपनी के मैनेजर बॉब क्विन का कहना है कि सामान्य सैनिक और रोबोट में एक ही अंतर है कि रोबोट का हथियार उसके कंधे पर नहीं होता. आधा मील दूर रिमोट कंट्रोल के ज़रिए नियंत्रित होता है.
रोबोट की परीक्षा
यह रोबोट टैलोन रोबोट की तर्ज़ पर बनाया गया है जिसका इस्तेमाल पिछले कुछ समय से बमों को निष्क्रिय करने में लगातार किया जाता रहा है.
रोबोट के साथ काम कर चुके एक अमरीकी सैनिक सैंटिएगो टॉरडिलोस का कहना है कि यह रोबोट आम सैनिकों से अधिक सटीक निशाना लगाता है क्योंकि यह अपना निशाना इलेक्ट्रॉनिक संदेशों के ज़रिए लगाता है.
इराक़ में पिछले एक साल में हिंसक घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है और अमरीकी सैनिक लगातार मारे जा रहे हैं.
सैनिकों की मौत अमरीका में एक गंभीर मुद्दा रहा है और जानकारों के अनुसार रोबोट सैनिकों की नियुक्ति की योजना इसी से जुड़ी हुई है.