गुरुवार, 20 जनवरी, 2005 को 14:08 GMT तक के समाचार
हज के अंतिम दिन दुनिया भर से आए बीस लाख से ज़्यादा मुसलमानों ने कोहे-अराफ़ात पर नमाज़ अदा की.
पाँच दिन तक चलने वाले इस अनुष्ठान में कोहे-अराफ़ात पर चढ़ना सबसे अहम माना जाता है.
सभी स्वस्थ मुसलमानों का यह फर्ज़ माना जाता है कि अगर उनकी हैसियत हो तो वो अपनी ज़िंदगी में एक बार हज करने ज़रूर आएँ.
सऊदी अरब के अधिकारियों ने भगदड़ मचने या आतंकवादी हमलों से बचने के लिए पचास हज़ार से ज़्यादा सुरक्षाकर्मी तैनात किए हैं.
नमाज़
सुबह होते ही हज यात्री कोई बीस हज़ार बसों में बैठकर कोहे-अराफ़ात पहुँचे, जहाँ चौदह सौ वर्ष पहले हज़रत मोहम्मद ने अपना अंतिम उपदेश दिया था.
दसियों हज़ार मुसलमानों ने अराफ़ात की नमेरा मस्जिद में नमाज़ अदा की.
मस्जिद से ख़िताब करते हुए, सऊदी अरब के सर्वोच्च धार्मिक नेता शेख़ अब्दुल अज़ीज़ अल-शेख़ ने कहा कि मुस्लिम देशों को सबसे बड़ी चुनौती अपनी नई पीढ़ी से मिल रही है जो हज़रत मोहम्मद के बताए रास्ते से भटक रहे हैं.
उन्होंने कहा, "मुसलमान क़ौम को सबसे बड़ी तकलीफ़ अपने ही कुछ बेटों से मिल रही है जो शैतान के बहकावे में आ गए हैं."
उन्होंने कहा कि इस्लाम के ख़िलाफ़ बैर और बढ़ने का ख़तरा है. शेख़ अब्दुल अज़ीज़ शेख़ ने कहा कि इस्लाम के ख़िलाफ़ सैन्य अभियान से लेकर आर्थिक और मीडिया अभियान चलाए जाएँगे.
सफ़ेद कपड़ों में लिपटे दसियों हज़ार मर्दों और औरतों ने अल्लाह से अपने गुनाहों की माफ़ी माँगी और नमाज़ अदा की.
नाइजीरिया के मोहम्मद ताहरियो ने कहा, "मैं यहाँ आकर बेहद ख़ुश हूँ और मैं अल्लाह से एक लंबे और समृद्ध जीवन की दुआ करता हूँ."
इराक़ के दयाला शहर से आए 45 वर्षीय अम्र अब्बास ने कहा कि वो दुआ करेंगे कि अमरीकी जल्दी उनके मुल्क से चले जाएँ और उनका क़ब्ज़ा ख़त्म हो.
सुरक्षा के प्रबंध
सऊदी प्रशासन ने हज यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के लिए कई उपाय किए थे.
अराफ़ात के नज़दीक तीन अस्थाई अस्पताल और 46 प्राथमिक उपचार केंद्र बनाए गए थे जिससे ज़रूरत पड़ने पर तुरंत चिकित्सा सहायता दी जा सके. कल्याणकारी संस्थाओं ने खाने-पीने की व्यवस्था की थी.
आतंकवादी हमलों से बचने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी. आतंक विरोधी दस्ते और पचास हज़ार पुलिसकर्मी और सैनिक तैनात रहे.
हेलिकॉप्टर कोहे अराफ़ात का हवाई मुआयना करते रहे.
पिछले वर्ष शैतान को पत्थर मारने की रस्म के दौरान मची भगदड़ में 251 हज यात्री मारे गए थे. ऐसी घटना फिर न हो इसके लिए प्रशासन ने नए, चौड़े और लम्बे खम्भे खड़े किए थे जिससे अधिक लोग एक साथ कंकड़ियां मार सकें.