मंगलवार, 11 जनवरी, 2005 को 10:30 GMT तक के समाचार
हिंद महासागर में आए भूकंप और सूनामी लहरों की अपार शक्ति ने न केवल हज़ारों लोगों की जान ली बल्कि पृथ्वी का आकार भी थोड़ा सा बदल दिया है.
भूगर्भ विज्ञानियों के अनुसार कुछ प्रायद्वीप कई कई मीटर खिसक गए हैं जिससे दुनिया का मानचित्र थोड़ा बदल भी गया है.
भूतल में टेक्टोनिक प्लेटों के भीषण टकराव के कारण हिंद महासागर का तल इंडोनेशिया की तरफ 15 मीटर खिसका दिया है.
वैज्ञानिक पहले ही बता चुके हैं कि इस भूकंप के कारण पृथ्वी अपनी धुरी से थोड़ा खिसक गई जिससे दिन की अवधि कुछ सेकंड कम हो गई.
बढ़ता दबाव
अंतरिक्ष एजेंसी नासा के अनुसार इस भूकंप के कारण उत्तरी ध्रुव भी कुछ सेंटीमीटर खिसक गया है.
पिछले एक सौ साल का यह चौथा सबसे बड़ा भूकंप था.
विशेषज्ञों के अनुसार पिछले डेढ़ सौ साल से भारतीय प्रायद्वीप के टेक्टोनिक प्लेटों के बीच दबाव बन रहा था और यह भूकंप उसी का नतीज़ा थी.
सुमात्रा द्वीप के निश्चित स्थान के बारे में यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ लंदन के बिल मैकगायर ने नेचर वेबसाइट से कहा" सुमात्रा निश्चित रुप से अपनी जगह से खिसक गया है. "
मैकगायर का मानना है कि ये प्रायद्वीप न केवल खिसके हैं बल्कि समुद्र तल से इनकी ऊंचाई पर भी फर्क पड़ा है.
हिल गई पृथ्वी
अमरीकी वैज्ञानिकों के अनुसार भूकंप ने पृथ्वी को अपनी धुरी पर कंपा दिया था.
नासा की जेट प्रोपलसन लेबोरेटरी में वैज्ञानिक रिचर्ड ग्रास कहते हैं कि पृथ्वी अपनी धुरी से एक इंच खिसकी थी.
भूकंप की प्रभाव यहीं तक सीमित नहीं रहा है. अंतरिक्ष से आ रही चित्रों से स्पष्ट हो रहा है कि कुछ समुद्र तट पूरी तरह नष्ट हो गए हैं.
थाईलैंड और इंडोनेशिया के कुछ तटों का आकार बिल्कुल बदल गया है.
कई तटों पर मौजूद शैवालों का आकार भी बदल गया है.