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रविवार, 09 जनवरी, 2005 को 07:59 GMT तक के समाचार

अन्नान मामले में एलटीटीई नाराज़

श्रीलंका में तमिल अलगाववादी संगठन एलटीटीई के एक नेता ने चेतावनी दी है कि संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफी अन्नान को सूनामी प्रभावित तमिल इलाक़ों में नहीं जाने देने का सरकार का फैसला शांति प्रक्रिया पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है.

एलटीटीई की राजनीतिक शाखा के प्रमुख एसपी तमिलसेल्वन ने सूनामी प्रभावित तमिल इलाक़ों में अन्नान की यात्रा पर लगाई गई रोक की कड़ी निंदा की है.

दो हफ्ते पहले हिंद महासागर में आई सूनामी लहरों से श्रीलंका में 30 हज़ार से अधिक लोग मारे गए थे.

इसके बाद से ही राहत कार्यों को लेकर एलटीटीई और सरकार के बीच तनातनी चल रही है.

तनाव का माहौल

इसी तनाव के कारण संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान वहाँ सूनामी से सबसे ज़्यादा प्रभावित कई इलाक़ो का दौरा नहीं कर पाए हैं.

उन्हें तमिल चरमपंथियों के नियंत्रण वाले कई उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों को देखने का निमंत्रण दिया गया था.

लेकिन श्रीलंका की सरकार उनके वहाँ जाने पर तैयार नहीं हुई.

कोफ़ी अन्नान का कहना था कि वे श्रीलंका में एक मानवीय मकसद से गए थे लेकिन श्रीलंका की सरकार के अतिथि भी थे.

उधर तमिलसेल्वन ने कहा कि कोफी अन्नान ने अपनी श्रीलंका यात्रा में चरमपंथी नेता वेलुपिल्लै प्रभाकरन से मुलाक़ात का निमंत्रण भी स्वीकार कर लिया था.

उन्होंने बीबीसी से कहा " यह बहुत ग़लत हो रहा है. अन्नान इन इलाक़ों में आना चाहते थे और सरकार ने उन्हें रोक दिया. इससे स्पष्ट है कि सरकार किस तरह का रवैया अपना रही है तमिल इलाक़ों में."

विश्व बैंक

कोफ़ी अन्नान के साथ विश्व बैंक के अध्यक्ष जेम्स वुल्फैंसॉन भी थी और उन्होंने कहा कि बैंक सहायता और पुनर्निर्माण के काम को नसल इत्यादि मुद्दों अलग रखेगा.

इससे पहले तमिल चरमपंथियों ने श्रीलंका की सरकार के उन दावों को ख़ारिज कर दिया था जिनमें 5000 एलटीटीई लड़ाकों के मारे जाने और एक बंदरगाह के नष्ट हो जाने की बात कही गई थी.

अनुमान है कि श्रीलंका में सूनामी के कारण लगभग तीस हज़ार लोग मारे गए.

विश्व खाद्य कार्यक्रम

उधर इंडोनेशिया के दौरे पर गए विश्व खाद्य कार्यक्रम के प्रमुख जिम मोरिस ने उम्मीद जताई है कि सूनामी से प्रभावित सभी लोगों तक अगले सात दिनों में खाद्य पदार्थ ज़रुर पहुँच जाएँगे.

मोरिस ने बीबीसी से कहा कि उन्हें उम्मीद है कि कोई भी सूनामी प्रभावित व्यक्ति भूख से नहीं मरेगा.

उन्होंने कहा कि आचे प्रांत में एक लाख 30 हज़ार लोगों की मदद की जा रही है. इसी प्रांत में दो सप्ताह पहले भीषण भूकंप और सूनामी लहरें आई थीं.

उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले कुछ दिनों में यह संख्या और बढ़ सकेगी और ज्यादा से ज्यादा लोगों तक सहायता पहुँच सकेगी.