शुक्रवार, 07 जनवरी, 2005 को 20:16 GMT तक के समाचार
सूनामी की मार झेल रहे दो देशों में सरकार और अलगाववादी विद्रोहियों के बीच तनाव बढ़ना एक बार फिर शुरू हो गया है जिससे राहत कार्यों के प्रभावित होने की आशंका व्यक्त की जा रही है.
श्रीलंका में तमिल विद्रोहियों ने चेतावनी दी है कि अगर सरकारी सैनिकों को राहत कैंपों से नहीं हटाया गया तो इसके गंभीर परिणाम होंगे.
तमिल विद्रोही लगातार ये शिकायत कर रहे हैं कि उनके नियंत्रण वाले इलाक़ों में सरकार पर्याप्त राहत उपलब्ध नहीं करवा रही है जबकि सरकार इन आरोपों का खंडन कर रही है.
सूनामी से सबसे बुरी तरह प्रभावित देश इंडोनेशिया में सरकारी सैनिकों और विद्रोहियों ने एक दूसरे पर हमले करने के आरोप लगाए हैं.
इंडोनेशियाई अधिकारियों का कहना है कि आचे प्रांत में विद्रोही सूनामी से पैदा हुई स्थिति का फ़ायदा उठाकर सरकारी सैनिकों पर हमले कर रहे हैं.
फ्री आचे मूवमेंट ने भी सरकार पर इसी तरह के आरोप लगाए हैं कि वह सूनामी का फ़ायदा उठाकर विद्रोहियों को कुचलना चाहती है.
उम्मीद
श्रीलंका का दौरा कर रहे अमरीकी विदेश मंत्री कॉलिन पॉवेल ने उम्मीद जताई है कि दोनों पक्षों के बीच सहयोग जारी रहेगा और यह सहयोग दशकों से चल रहे टकराव को सुलझाने के लिए नई ज़मीन तैयार करेगा.
लेकिन कोलंबो से बीबीसी की संवाददाता फ्रांसिस हैरिसन का कहना है कि सूनामी के कारण अल्पसंख्यक तमिलों की शिकायतें बढ़ी हैं और टकराव कम होने के बदले बढ़ सकता है.
इस विवाद में संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थियों से संबंधित संस्था भी कूद पड़ी है, श्रीलंका में यूएनएचसीआर के समन्वयक नील राइट ने कहा, "सेना इस तरह के शिविरों का प्रबंधन करने के लिए उपयुक्त नहीं है."
कॉलिन पॉवेल श्रीलंका के सूनामी प्रभावित इलाक़ों का हेलिकॉप्टर से दौरा किया जहाँ अमरीकी सैनिकों को राहत अभियान चलाने के लिए तैनात किया जाने वाला है.
श्रीलंका की राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंगा से मुलाक़ात के बाद कॉलिन पॉवेल ने कहा कि वे राष्ट्रपति बुश को देश की हालत के बारे में सोमवार को विस्तार से जानकारी देंगे.
इस बीच संयुक्त राष्ट्र के महासचिव कोफ़ी अन्नान भी श्रीलंका पहुँच गए हैं जहाँ वे राहत कार्यों का जायज़ा लेंगे और सरकारी अधिकारियों से मुलाक़ात करेंगे.
तमिल विद्रोहियों का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र के महासचिव ने उनके नेता वेलुपिल्लै प्रभाकरन से बातचीत का निमंत्रण भी स्वीकार कर लिया है.
आचे में तनाव
इंडोनेशिया के आचे प्रांत में भी इस बात की उम्मीदें धूमिल हो गई हैं कि सूनामी के कारण सरकार और अलगाववादियों के रिश्ते सुधर सकते हैं.
आचे में दोनों पक्षों के बीच सूनामी के बाद युद्धविराम की घोषणा की गई थी लेकिन अब दोनों तरफ़ से इसके उल्लंघन के आरोप लग रहे हैं.
इंडोनेशियाई सैनिकों का कहना है कि आचे के विद्रोहियों के कारण राहत कार्यों में बाधा आ रही है जबकि विद्रोही सरकार पर आरोप लगा रहे हैं कि वह सूनामी के बहाने उन्हें कुचलने की फिराक में है.
दोनों में से कौन सही है, पक्के तौर पर कहना मुश्किल है.
इंडोनेशिया में सूनामी से मरने वालों की संख्या एक लाख तक पहुँचने की आशंका जताई जा रही है और आचे में टकराव शुरू हुआ तो स्थिति और मुश्किल हो जाएगी.