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सोमवार, 03 जनवरी, 2005 को 01:16 GMT तक के समाचार

सक्रिय है इराक़ी पर्यटन बोर्ड!

इस समय इराक़ चाहे दुनिया की सबसे ख़तरनाक जगह हो लेकिन आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि वहाँ का पर्यटन बोर्ड अब भी सक्रिय है.

बोर्ड के अध्यक्ष अहमद जाबौरी मानते हैं कि वर्ष 2004 में एक भी पर्यटक इराक़ नहीं आया.

यही नहीं वे पर्यटकों को इराक़ जाने के ख़िलाफ़ सावधान भी करते हैं. वे कहते हैं कि इराक़ जाना 'वन-वे ट्रिप' यानी एक तरफ़ की यात्रा हो सकती है.

बीबीसी संवाददाता केरोलीन हौली ने पता लगाया कि फिर बोर्ड के लगभग ढ़ाई हज़ार कर्मचारी क्या काम करते हैं?

अहमद जाबौरी कहते हैं कि देश के दक्षिण से उत्तर तक 14 पर्यटन केंद्र काम कर रहे हैं.

ये केंद्र विद्रोहियों और अमरीकी सेना की झड़पों के प्रमुख केंद्रों - मूसल, बसरा, सद्दाम के गृह नगर तिकरीत और रमादी सहित कई नगरों में स्थित हैं.

अहमद जाबौरी का कहना है कि कर्मचारी होटलों और रेस्तरां को लाइसेंस देने और भविष्य के लिए योजनाएँ बनाने में व्यस्त हैं.

वैसे इराक़ में पहाड़ी इलाक़ों के साथ-साथ देखने लायक कई ऐतिहासिक स्थल हैं.

इराक़ को प्राचीन सभ्यता का गर्भ कहा जाता है लेकिन इस समय बैबिलोनिया की सभ्यता के खंडहर एक सैनिक अड्डे में हैं.

सुमेर की प्राचीन सभ्यता का मंदिर परिसर भी अब एक सैनिक अड्डे में स्थित है. माना जाता है कि सुमेर की सभ्यता में लिखाई का अविष्कार हुआ था.

इराक़ में ही स्थित हबानिया झील जो एक जाना-माना पर्यटक स्थल है, अब फ़लूजा से विस्थापित हुए लोगों का राहत शिविर है.

अहमद जाबौरी ज़ोर देकर कहते हैं कि उनकी सलाह यही है कि अपनी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए किसी भी विदेशी को इस समय इराक़ नहीं आना चाहिए.

लेकिन वे साथ ही कहते हैं कि भविष्य में इराक़ में पर्यटन को बढ़ावा मिलने की संभावनाओं के बारे में उन्हें काफ़ी आशा है.