शनिवार, 01 जनवरी, 2005 को 11:10 GMT तक के समाचार
भूकंप और सुनामी लहरों से बुरी तरह प्रभावित इलाक़ों में राहत कार्यों में तेज़ी आ रही है.
सहायता सामग्री से लदे जहाज़ और विमान रविवार को आई प्राकृतिक आपदा से प्रभावित इलाक़ों में पहुँचने शुरू हो गए हैं.
अमरीका का विमानवाही पोत अब्राहम लिंकन इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप तक पहुँच गया है. इस पोत से हेलीकॉप्टरों के ज़रिए उन क्षेत्रों तक सहायता पहुँचाई जाएगी जो अब भी शेष विश्व से कटे हुए हैं.
इंडोनेशियाई अधिकारियों के अनुसार सुदूरवर्ती इलाक़ों तक राहत सामग्री पहुँचाने की व्यवस्था क़ायम नहीं की जा सकी है.
सबसे ज़्यादा तबाही झेलने वाले इंडोनेशियाई प्रांत आचे से बीबीसी के एक संवाददाता के अनुसार राहतकर्मियों की कमी और सीमित स्थान के कारण राजधानी बन्दा आचे के छोटे-से हवाई अड्डे पर अव्यवस्था की स्थिति है.
आचे में 20 लाख से ज़्यादा लोग बेघर हो गए हैं.
सहायता संस्थाओं ने चेतावनी दी है कि सुदूरवर्ती इलाक़ों में फंसे लोगों तक अविलंब भोजन-पानी नहीं पहुँचाया गया तो हज़ारों लोगों की मौत हो सकती है.
इस बीच श्रीलंका में बारिश के कारण राहत कार्य बाधित हुए हैं.
मृतकों की बढ़ती संख्या
सुमात्रा के पास हिंद महासागर में आए ज़ोरदार भूकंप और उसके कारण पैदा हुई ऊँची-ऊँची सुनामी लहरों की चपेट में आकर मलेशिया से लेकर पूर्वी अफ़्रीका तक के विभिन्न तटीय इलाक़ों में सवा लाख लोगों के मारे जाने की पुष्टि की जा चुकी है.
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार मृतकों की संख्या डेढ़ लाख के आंकड़े को छू सकती है.
हज़ारों लोग अब भी लापता हैं.
इस अभूतपूर्व प्राकृतिक आपदा से प्रभावित कई देशों में नए साल के समारोह रद्द कर दिए गए और मृतकों के लिए शोक सभाओं का आयोजन किया गया.
स्वीडन, नॉर्वे, डेनमार्क और फ़िनलैंड ने एक दिन का शोक घोषित किया है. थाइलैंड में मारे गए विदेशी पर्यटकों में सबसे ज़्यादा स्वीडन के ही थे.