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गुरुवार, 23 दिसंबर, 2004 को 03:40 GMT तक के समाचार

मूसल हमले के बाद रम्सफ़ेल्ड पर दबाव

इराक़ के मूसल शहर में मारे गए अमरीकी सैनिकों को लेकर अमरीकी रक्षा मंत्री डोनल्ड रम्सफ़ेल्ड पर दबाव बढ़ गया है.

बुधवार को वाशिंग्टन में एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान उन्हें तीखे सवालों का सामना करना पड़ा.

इससे पहले अमरीकी रक्षा विभाग पेंटागन ने इस बात की आशंका जताई कि मंगलवार को मूसल में हुआ हमला शायद एक आत्मघाती हमला था.

यदि ऐसा होता है तो इराक़ में किसी अमरीकी सैनिक अड्डे पर आत्मघाती हमले की यह पहली घटना होगी.

हमले में 19 अमरीकी सैनिकों समेत 22 लोग मारे गए थे.

अमरीकी सेनाओं के प्रमुख जनरल रिचर्ड मायर्स और रक्षा मंत्री रम्सफ़ेल्ड जब वाशिंग्टन के संवाददाता सम्मेलन में पहुँचे तो पत्रकारों के कड़वे सवालों की बौछार से उनका सामना हुआ.

जनरल मायर्स ने पत्रकारों से कहा कि इस वक़्त ऐसा लग रहा है कि इराक़ में अमरीकी अड्डे पर हुआ हमला एक आत्मघाती बम हमला था.

दोनों अधिकारियों से बार-बार ये सवाल पूछा गया कि चरमपंथी अमरीकी अड्डे पर सुरक्षा घेरे को कैसे पार कर पाए.

'जीतना होगा'

जनरल मायर्स ने कहा, "इन चरमपंथियों के लिए कोई नैतिक सीमाएँ नहीं है. ये तो सिर्फ़ गठबंधन सेना और विदेशी ठेकेदारों पर हमला था मगर बग़दाद में इराक़ी आम जनता और बच्चों तक पर हमले हुए हैं. ऐसा ना हो इसके लिए रास्ता सिर्फ़ एक ही है, हम जीतें और हम ऐसा ही करेंगे."

रम्सफ़ेल्ड ने सैनिकों की मौत पर दुख व्यक्त किया है.

इस बीच रम्सफ़ेल्ड के नेतृत्व को लेकर कई तरह के सवाल उठाए जा रहे हैं.

बीबीसी के एक संवाददाता के अनुसार इराक़ पर हमले को लेकर रक्षा मंत्री ने जिस तरह का रवैया अपनाया है उसकी भी कड़ी आलोचना की गई है, ख़ासकर जब हाल ही में इराक़ में मारे गए अमरीकी सैनिकों के परिवारों को ये मालूम हुआ कि रक्षा मंत्री की ओर से भेजे गए शोक संदेशों पर उन्होंने ख़ुद हस्ताक्षर नहीं किए थे.