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मंगलवार, 21 दिसंबर, 2004 को 15:46 GMT तक के समाचार

हमले में 19 अमरीकी सैनिकों की मौत

इराक़ के उत्तरी शहर मूसल में अमरीकी सैनिक अड्डे पर रॉकेटों और मोर्टारों से हमला किया गया है जिसमें कम से कम 19 अमरीकी सैनिक मारे गए हैं.

इराक़ में अमरीकियों पर यह अब तक का सबसे बड़ा हमला था.

हमले में पाँच इराक़ी की भी मौत हुई है.

अमरीकी सैन्य अधिकारियों ने कहा है कि मेरेज़ शिविर अड्डे के उस टेन्ट में विस्फोट हुआ जहाँ भोजन किया जाता है.

एक वेबसाइट पर प्रकाशित किए गए एक बयान में कहा गया है कि यह हमला अंसार अल सुन्ना नाम के संगठन ने किया. बयान को भी इसी संगठन की तरफ़ से प्रकाशित बताया गया है.

हालाँकि अभी आत्मघाती हमला होने के दावे की पुष्टि नहीं हुई है. मौक़े पर मौजूद लोगों का कहना है कि उन्होंने सैन्य अड्डे पर कुछ विस्फोटों की आवाज़ें सुनीं और धुआँ उठता देखा.

पहले सैन्य अधिकारियों ने कहा था कि कुछ अज्ञात हमलावरों ने स्थानीय समय के अनुसार दोपहर 1200 बजे रॉकेटों और मोर्टारों से हमला किया और हमले का निशाना संभवतः सैन्य अड्डे का भोजन कक्ष था.

उत्तरी इराक़ में तैनात टास्क फ़ोर्स ओलंपिया के एक प्रवक्ता लैफ़्टिनेंट कर्नल पॉल हेस्टिंग्स ने कहा कि पूरी घटना की जाँच की जा रही है.

उन्होंने कहा, "हम नहीं जानते कि यह कोई मोर्टार हमला था या फिर कोई बम विस्फोट."

टास्क फ़ोर्स ओलंपिया के कमांडर ब्रिगेडियर जनरल कार्टर हैम ने टेलीविज़न पर दिए एक बयान में कहा, "यह दरअसल बहुत ही दुख भरा दिन था."

लगातार हमले

यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब अगले महीने प्रस्तावित चुनावों की तैयारियाँ ज़ोरशोर से चल रही हैं और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने भी मंगलवार को राजधानी बग़दाद का दौरा किया है.

मूसल में नवंबर के बाद से हिंसा में तेज़ी आई है. नवंबर में वहाँ विद्रोहियों ने कुछ थानों पर क़ब्ज़ा कर लिया था.

अमरीकी सैना ने कहा है कि दिन में इराक़ी पुलिस ने शहर के बीचों बीच एक थाने पर विद्रोहियं के हमले को नाकाम कर दिया.

उधर समाचार एजेंसी एपी ने ख़बर दी है कि मूसल में सैकड़ों छात्र इस माँग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं कि अमरीकी सैनिक लोगों के घरों और मस्जिदों में घुसना बंद करें.

सुन्नी बहुल मूसल इराक़ का तीसरा बड़ा शहर है जो राजधानी बग़दाद से क़रीब 370 किलोमीटर उत्तर में है.

उस इलाक़े में अरब और कुर्द समुदायों में तनाव रहता है.

पिछले महीने लगभग हर दिन अमरीकी और इराक़ी सैनिकों पर हमले होते रहे हैं.

दिसंबर महीना शुरू होने के साथ ही मूसल के आसपास क़रीब 80 शव पाए गए थे जिनमें बहुत से इराक़ी नेशनल गार्ड के सदस्यों के थे.