http://www.bbcchindi.com

रविवार, 14 नवंबर, 2004 को 18:58 GMT तक के समाचार

बाल बाल बचे महमूद अब्बास

फ़लस्तीनी चरमपंथियों ने यासिर अराफ़ात के निधन का शोक मना रहे लोगों पर गोलियां चलाई हैं और कहा जा रहा है कि ये चरमपंथी फ़लस्तीनी नेता और पूर्व प्रधानमंत्री महमूद अब्बास यानी अबू माज़ेन के वहां आने से नाराज़ थे.

महमूद अब्बास सुरक्षित हैं लेकिन ग़ज़ा में हुई इस गोलीबारी में दो सुरक्षा गार्डों की मौत हो गई और चार फ़लस्तीनी घायल हो गए.

फ़लस्तीनी मुक्ति संगठन के अध्यक्ष पद के लिए चुनावों की घोषणा के बाद से अब्बास को इस पद का दावेदार माना जा रहा है.

पिछले गुरुवार को अराफ़ात का निधन हुआ था. आज यहां लोग उनका शोक मनाने जुटे थे.

संवाददाताओं का कहना है कि घटनास्थल पर भ्रम की स्थिति है और अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि ये गोलीबारी अब्बास को निशाना बनाकर की गई थी या नहीं.

चरमपंथियों ने महमूद अब्बास और उनके क़रीबी ग़ज़ा के पूर्व सुरक्षा प्रमुख मोहम्मद दहलन के ख़िलाफ़ जमकर नारेबाज़ी की. कुछ ख़बरों के अनुसार चरमपंथियों ने "अब्बास और दहलन अमरीका के एजेंट हैं" और "अबु माज़ेन नहीं" का नारा लगाया.

जैसे ही गोलियाँ चलनी शुरू हुई महमूद अब्बास को उनके अंगरक्षक वहाँ से सुरक्षित बाहर ले गए. वहाँ मौजूद क़रीब एक हज़ार लोग भी गोलियों की आवाज़ सुनते ही भाग गए.

महमूद अब्बास के जाने के बाद भी सुरक्षा बल और चरमपंथियों के बीच गोलाबारी हुई और माना जा रहा है कि ये चरमपंथी महमूद अब्बास की फ़तह पार्टी के सदस्य थे.

इस बीच फ़लस्तीनी अधिकारियों ने बताया है कि फ़लस्तीनी प्रशासन के राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव अगले साल नौ जनवरी को होंगे.

अंतरिम राष्ट्रपति राव्ही फ़त्तुह ने रविवार को ये घोषणा की.

ग़ौरतलब है कि यासिर अराफ़ात की मौत के बाद ये चुनाव हो रहे हैं. यासिर अराफ़ात फ़लस्तीनी प्रशासन के राष्ट्रपति होने के साथ-साथ फ़लस्तीन मुक्ति संगठन यानी पीएलओ भी अध्यक्ष थे.

कई दिन की बीमारी के बाद 11 नवंबर 2004 को पेरिस के एक सैन्य अस्पताल में निधन हो गया था.

फ़लस्तीनी प्रशासन का कामकाज इस समय फ़लस्तीनी नेताओं का एक संयुक्त नेतृत्व चला रहा है.

महमूद अब्बास उम्मीदवार

फ़लस्तीनी मुक्ति संगठन (पीएलओ) और उसके सशस्त्र संगठन फ़तह ने चुनाव के लिए पूर्व प्रधानमंत्री महमूद अब्बास उर्फ़ अबू माज़ेन को अपना उम्मीदवार चुना है.

अन्य उम्मीदवारों में फ़लस्तीनी प्रधानमंत्री अहमद क़ुरई और फ़ारुक़ क़दूमी हो सकते हैं जिन्हें हाल में फतेह का अध्यक्ष बनाया गया था.

यरूशलम पर विवाद

उधर इस चुनाव पर इसराइली मंत्रिमंडल में मतभेद हो गए हैं.

फ़लस्तीनी लोग माँग कर रहे हैं कि इसराइल उन्हें गज़ा पट्टी, पश्चिमी तट और पूर्वी यरुशलम में बिना किसी रोक-टोक के चनाव प्रचार की अनुमति दे.

उन्होंने अमरीका और यूरोपीय संघ से अनुरोध किया है कि इस बारे में वे संभावित इसराइली रोक-टोक को बंद कराएँ.

उधर इसराइली विदेश मंत्री सिलवम शेलॉम ने कहा है कि पूर्वी यरूशलम के निवासियों को मतदान नहीं करना चाहिए क्योंकि उससे शहर के भविष्य पर असर पड़ सकता है.