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रविवार, 07 नवंबर, 2004 को 05:47 GMT तक के समाचार

इराक में दो महीने के लिए आपातकाल लागू

इराक़ की अंतरिम सरकार ने देश भर में 60 दिनों के लिए आपातकाल की घोषणा कर दी है.

सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि उत्तर के कुर्द बहुल इलाक़ों को छोड़कर पूरे देश भर में आपातकाल लगा दिया गया है.

उधर सुन्नी त्रिकोण के नाम से मशहूर इलाक़ों में लगातार दूसरे दिन विद्रोहियों ने पुलिस थानों को निशाना बनाया है जिसमें अब तक कम से कम 40 लोगों के मारे जाने की ख़बर है.

ब़गदाद से दो सौ किलोमीटर दूर हदिथा शहर में सबसे गंभीर हमला किया गया जहां दर्ज़नों विद्रोहियों ने थाने पर हमला किया. थाने में मौजूद सभी पुलिसकर्मियों से हथियार छीन लिए गए और उन्हें गोली मार दी गई.

पुलिस के अनुसार इस हमले में 21 लोग मारे गए. ऐसी ही एक घटना पास के हकलानियाह प्रांत में भी हुई जहां एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की हत्या कर दी गई.

इससे पहले शनिवार को चरमपंथियों ने सुन्नी त्रिकोण के नाम से मशहूर इलाकों में पुलिस थानों को निशाना बनाना शुरु किया था. इन हमलों में समारा के पुलिस थाने में कई पुलिसकर्मियों को मौत के घाट उतार दिया गया.

रिपोर्टों के अनुसार दो दिन में कम से कम 40 पुलिसकर्मी मारे गए हैं.

इराक़ में मौजूद बीबीसी संवाददाताओं का कहना है कि ये हमले अमरीकी सैनिकों द्वारा फ़लूजा पर हमले की तैयारी के जवाब में किए जा रहे हैं.

उधर अमरीकी सेना ने फ़लूजा पर हमले की पूरी तैयारी में है. इसके तहत शनिवार देर रात से हवाई हमले किए जा रहे हैं.

फ़लूजा पर निशाना

फ़लूजा को इराक़ में विद्रोहियों का सबसे मज़बूत गढ़ माना जाता है.

अमरीकी विमान लगातार शहर के ऊपर उड़ान भर रहे हैं और विद्रोहियों पर गोलीबारी कर रहे हैं.

समारा में हमलों के बाद फ़लूजा में विद्रोहियों के ख़िलाफ़ तैयारी कर रहे अमरीकी सैन्य अधिकारियों का कहना है कि विद्रोही इस हमले के प्रतिरोध में कार बम और आत्मघाती हमलों का सहारा ले सकते हैं और रासायनिक हथियारों का भी प्रयोग कर सकते हैं.

अमरीकी सेना और इराक़ी सुरक्षा बलों ने पिछले कई दिनों से फ़लूजा में दबाव बना रखा है.

संवाददाताओं का कहना है कि समारा में हुआ हमला फ़लूजा में दबाव कम करने का एक तरीक़ा हो सकता है.

ख़बर है कि फ़लूजा शहर के भीतर से विद्रोहियों, कबीलों के नेताओं और सुन्नी मुस्लिम नेताओं ने पत्रकारों को अपने संरक्षण में शहर में आने का निमंत्रण दिया है जिससे कि वे लोगों पर किए जाने वाले हमलों को देख सकें.

वे इस तरह के हमलों को इस्लाम पर हमला मानते हैं.