शनिवार, 06 नवंबर, 2004 को 18:40 GMT तक के समाचार
फ़लस्तीनी प्रधानमंत्री अहमद क़ुरई ने ग़ज़ा में अलग-अलग चरमपंथी गुटों से बातचीत करने के बाद कहा है कि सभी गुट सुरक्षा-व्यवस्था बनाए रखने पर सहमत हैं.
बातचीत में इस्लामिक जेहाद और हमास के प्रतिनिधि भी शामिल हुए. फ़लस्तीनी नेता यासिर अराफ़ात के ख़राब स्वास्थ्य के बीच प्रधानमंत्री क़ुरई ने सभी गुटों के बीच एकता की ज़रूरत बताई.
फ़लस्तीनी अधिकारियों ने इस आशंका को ख़ारिज कर दिया है कि अगर अराफ़ात का निधन हो गया तो सत्ता संघर्ष बढ़ जाएगा और चरमपंथी गुटों में भी टकराव हो सकता है.
यासिर अराफ़ात की तबीयत बिगड़ने के बाद फ़लस्तीनी नेतृत्व और चरमपंथी गुटों के बीच ये पहली बातचीत थी.
बीबीसी के ग़ज़ा संवाददाता एलेन जॉन्स्टन ने कहा है कि बातचीत का मक़सद इस मुश्किल समय में शांति व्यवस्था और एकता बनाए रखना था.
बैठक में शामिल होने जा रहे इस्लामिक जेहाद के एक प्रतिनिधि ने फ़लस्तीनी लोगों से अपील की कि वे इसराइल के ख़िलाफ़ संघर्ष में एकजुट हो जाएँ.
राष्ट्रीय नेतृत्व
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इस्लामिक जेहाद और हमास जैसे चरमपंथी गुट एक ऐसा व्यापाक राष्ट्रीय नेतृत्व चाहते हैं जिसमें उनकी भी चले.
हमास के एक प्रवक्ता ने बैठक के बाद बताया कि क़ुरई ने सिद्धांतरूप में इस पर सहमति हैं और उन्होंने कहा है कि इसे लागू करने के तरीक़ों पर और बातचीत की जाएगी.
लेकिन बीबीसी संवाददाता का कहना है कि प्रधानमंत्री क़ुरई पत्रकारों से बात करते समय इस विषय पर ज़्यादा नहीं बोले.
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय एकता कैसे बनी रहे- इसके हर स्वरूप पर बातचीत हो रही है.
क़ुरई ने कहा, "किसी भी घरेलू समस्या को राष्ट्रीय स्तर पर बातचीत से ही सुलझाया जा सकता है. यही एकमात्र रास्ता है."
फ़लस्तीनी विदेश मंत्री नाबिल साथ ने कहा है कि मौजूदा बातचीत उस प्रक्रिया का हिस्सा है जिसके तहत राष्ट्रीय सहमति वाली सरकार की स्थापना की जा सके.