शनिवार, 06 नवंबर, 2004 को 02:15 GMT तक के समाचार
संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान ने कहा है कि फ़लूजा जैसी संवेदनशील जगहों पर हमले से इराक़ में आगामी चुनावों में बाधा पड़ सकती है.
उधर अमरीकी सेना फ़लूजा के बाहरी इलाके में पहुँच गई है और विद्रोहियों पर हवाई हमले और तोपों से हमले किए गए हैं.
लेकिन असली सैनिक अभियान फ़िलहाल नहीं हुआ है और इस कार्रवाई को उस हमले की तैयारी बताया जा रहा है.
'नकारात्मक असर'
संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश, ब्रितानी प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर और इराक़ी प्रधानमंत्री ईयाद अलावी को लिखे पत्र में इस हमले का राजनीतिक प्रक्रिया पर नकारात्मक असर होने की बात कही है.
बीबीसी को भी ये पत्र हासिल हुआ है जिसमें कहा गया है कि हमले के डर से इराक़ी समुदाय अलग-थलग पड़ सकते हैं.
दूसरी ओर अमरीका का कहना है कि इराक़ में विद्रोहियों से जल्द से जल्द निबटने ज़रूरी है और इसीलिए इस चिट्ठी से अमरीकी अधिकारी नाराज़ हैं.
इराक़ी प्रधानमंत्री ईयाद अलावी का भी कहना है,"ये एक संशय भरा पत्र था. उनके पत्र से जो संदेश मिला वो बिल्कुल भी स्पष्ट नहीं है और न्यूयॉर्क में मौजूद अपने प्रतिनिधि के ज़रिए हम उनसे स्पष्टीकरण माँग रहे हैं. हमें नहीं पता कि उनके पास क्या विकल्प हैं?"
'घेराबंदी शुरु'
इराक़ी और अमरीकी फ़ौजों ने फ़लूजा को घेरना शुरू कर दिया है.
बीबीसी संवाददाता पॉल वुड बताते हैं कि अब तो वहाँ से गोलियों की आवाज़ें भी सुनाई देने लगी हैं.
ये अब तक का फ़लूजा में अमरीकी नेतृत्व वाली फ़ौजों का सबसे बड़ा अभियान होगा.
अधिकारी बार-बार ये ज़ोर दे रहे हैं कि हमले का अंतिम फ़ैसला इराक़ी प्रधानमंत्री के हाथ में होगा.
यूरोपीय संघ के प्रतिनिधियों से मिलने ब्रसेल्स गए अलावी ने ख़ुद भी इस बात पर ज़ोर दिया और कहा कि इराक़ की सरकार का ही इस बारे में अंतिम फ़ैसला होगा.
उनका कहना था,"हमने फ़लूजा के लोगों को वहाँ से आतंकवादियों को निकालने के लिए काफ़ी समय दिया मगर वे ऐसा नहीं कर सके और इस तरह वे हमारा हस्तक्षेप चाह रहे हैं."
अमरीकी मरीन सैनिकों का मानना है कि फ़लूजा में कई हज़ार विद्रोही मौजूद हैं.
मगर अभी तक ये स्पष्ट नहीं है कि इतनी बड़ी सेना के सामने ये विद्रोही संघर्ष करेंगे या बस हथियार डाल देंगे और किसी दूसरे शहर की ओर बढ़ जाएँगे.