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शुक्रवार, 05 नवंबर, 2004 को 08:28 GMT तक के समाचार

'अराफ़ात की हालत स्थिर'

पेरिस के पर्सी अस्पताल के एक प्रवक्ता ने कहा है कि फ़लस्तीनी नेता यासिर अराफ़ात की हालत स्थिर बनी हुई है. उनकी हालत में कोई सुधार नहीं है. इसी अस्पताल में अराफ़ात का इलाज चल रहा है.

लेकिन अस्पताल के प्रवक्ता ने इतना ज़रूर कहा कि उनकी हालत और ख़राब नहीं हुई है.

इससे पहले अराफ़ात की सलाहकार लैला शाहिद ने उनके स्वास्थ्य के बारे में कहा है कि अराफ़ात अचेतावस्था में हैं और ज़िंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं.

लेकिन उन्होंने कहा कि वह ऐसी अचेतावस्था में हैं जहाँ से बाहर भी आ सकते हैं.

फ्रांस में फ़लस्तीनी दूत लैला शाहिद ने कहा, "मैं आपको भरोसा दिला सकती हूँ कि अराफ़ात की दिमाग़ी मौत नहीं हुई है."

हालाँकि लैला शाहिद ने शुक्रवार सुबह पेरिस में फ्रांसीसी रेडियो से कहा, "अराफ़ात ज़िंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं."

गुरूवार को ऐसी ख़बरें फैल गई थीं कि यासिर अराफ़ात की मौत हो गई है लेकिन पेरिस के उस सैनिक अस्पताल के डॉक्टरों ने ऐसी ख़बरों का खंडन किया था कि जहाँ अराफ़ात का इलाज किया जा रहा है.

अस्पताल में मौजूद एक बीबीसी संवाददाता का कहना है कि अस्पताल के सूत्रों के अनुसार उन्हें 'लाइफ़ सपोर्ट सिस्टम' पर रखा गया है.

इस बीच यासिर अराफ़ात की कुछ ज़िम्मेदारियाँ फ़लस्तीनी प्रधानमंत्री अहमद क़ुरई को दी गई हैं और वह ग़ज़ा पट्टी का दौरा करने वाले हैं.

समझा जाता है कि क़ुरई वहाँ चरमपंथी संगठन हमास के कुछ नेताओं से मुलाक़ात करेंगे.

एक अन्य वरिष्ठ फ़लस्तीनी नेता साएब एराकात ने कहा कि फ़लस्तीनियों को दिखाना चाहिए कि यासिर अराफ़ात की ग़ैरमौजूदगी में सत्ताहीनता की स्थिति नहीं बनी है.

उन्होंने कहा कि वह नहीं समझते कि कोई अंदरूनी मतभेद हैं. बुधवार रात को अराफ़ात की तबीयत फिर बिगड़ गई थी.

ज़िंदगी और मौत के बीच

लैला शाहिद ने फ्रांसीसी और इसराइली मीडिया में छपी उन ख़बरों का ज़ोरदार खंडन किया कि यासिर अराफ़ात की दिमाग़ी मौत हो गई है और उन्हें मशीनों के सहारे जीवित रखा जा रहा है.

लैला शाहिद न कहा, "वह अचेतावस्था में हैं, किस तरह की अचेतावस्था है, हम नहीं जानते लेकिन यह ऐसी अवस्था है जिससे वह बाहर आ सकते हैं."

लैला शाहिद का कहना था, "आज (शुक्रवार) को हम कह सकते हैं कि यासिर अराफ़ात का स्वास्थ्य स्थिर है वह अपनी उम्र के हिसाब से वह अपनी ज़िंदगी और मौत के बीच की गंभीर स्थिति में हैं."

लेकिन पेरिस में बीबीसी संवाददाता केरालीन व्याट का कहना है कि ऐसा लगता है कि अराफ़ात की ज़िंदगी आहिस्ता-आहिस्ता अंत की तरफ़ बढ़ रही है, यह कुछ घंटों या कुछ दिन का मामला है, यह अभी साफ़ नहीं है.

व्याट का कहना है कि अस्पताल के सूत्रों के मुताबिक़ अराफ़ात की हालत बहुत बिगड़ने के बाद उन्हें मशीनों के सहारे ज़िंदा रखा जा रहा है.