रविवार, 31 अक्तूबर, 2004 को 23:37 GMT तक के समाचार
वाशिंगटन डीसी से विनीता द्विवेदी
बीबीसी हिंदी संवाददाता
क्या बुश रिवायतें तोड़कर फिर से गद्दी पाएंगे? क्या अगले चार सालों के लिए फिर से व्हाइट हाउस पर जॉर्ज बुश का अधिकार रहेगा.
अगर अमरीका के एक पुराने अंधविश्वास पर विश्वास किया जाए तो इस सवाल का जवाब होगा 'नहीं'.
यूँ तो रोज़ाना ही नए-नए चुनाव पूर्व विश्लेषण आते रहते हैं जिनमें अभी तक बुश और उनके प्रतिद्वंद्वी जॉन कैरी के बीच टक्कर बिल्कुल बराबरी की है.
ऐसे में जो लोग पुरानी कहावतों और अंधविश्वास में भरोसा करते हैं उनके लिए अमरीकी फ़ुटबॉल टीम ‘रेड स्किन’ के मैच का नतीजा चुनाव परिणाम का संकेतक हो सकता है.
माना यह जाता है कि चुनाव के ठीक पहले 'रेड स्किन' अगर मैच जीतती है तो व्हाइट हाउस में रहने वाला प्रत्याशी चुनाव जीतता है और अगर टीम हार जाती है तो नया राष्ट्रपति व्हाइट हाउस की शोभा बढ़ाता है.
‘रेड स्किन’ के प्रदर्शन पर की गई यह भविष्यवाणी 17 बार सही रही है. और रविवार रात को हुए मैच में ‘रेड स्किन’ टीम मैच हार गई है जो डेमोक्रेट पार्टी के लिए ख़ुशख़बरी मानी जा रही है.
शगुन-अपशुगन
इस साल के चुनाव की यह दौड़ इतनी काँट की हो चली है कि लोग तरह तरह के शगुन – अपशगुन पर ध्यान दे रहे हैं.
डाओ जोन्स के सूचकाँक से लेकर हैलोईन के त्यौहार पर बिकने वाले मुखौटों की बिक्री पर आधारित भविष्यवाणियाँ यहाँ की जा रही हैं.
हालाँकि एक आँकड़ा तो बुश के खाते में जाता है. माना जाता है कि देश के बच्चों के नक़ली मतदान में जो जीतता है, वही असल चुनाव में भी जीतता है.
शुक्रवार को हुए इस नक़ली मतदान में बुश को बच्चों के 60 प्रतिशत वोट मिले.
लेकिन फिर खेल पर आएँ तो सीनेटर केरी के शहर बोस्टन की बेसबॉल टीम को पिछले हफ़्ते मिली सफलता उनके लिए बेहतर शगुन बताई जा रही है.
रेड सॉक्स ने 1918 में आख़िरी बार यह विश्व श्रंखला जीती थी और तब भी डेमोक्रेट उम्मीदवार ने चुनाव जीता था. इसे फिर केरी के लिए अच्छा शगुन माना जा रहा है.
कौन तोड़ेगा अंधविश्वास?
अंधविश्वास तो तोड़ने के लिए ही होते हैं और चुनावों के बाद कुछ टूटेंगे भी.
लेकिन अगर जॉर्ज बुश फिर जीतते हैं तो किसी अमरीकी राष्ट्रपति के पुत्र के दूसरे बार जीतने का भी यह पहला मौक़ा होगा.
और अभी तक के सर्वेक्षणों के नतीजों के बाद कहा यह भी जा रहा है कि लगातार दूसरी बार ऐसा हो सकता है कि लोकप्रिय मतों को न जीतने के बावजूद दोनों में से एक प्रत्याशी इलेक्टोरल कॉलेज के मतों से राष्ट्रपति बन जाए.