गुरुवार, 28 अक्तूबर, 2004 को 17:04 GMT तक के समाचार
सैनफ़्रांसिस्को से अपूर्व कृष्ण
बीबीसी हिंदी संवाददाता
अमरीका के राष्ट्रपति चुनाव में मात खानेवाले प्रत्याशी का नाम सुर्खियों से वैसे जल्दी ही बाहर हो जाता है मगर 2000 के अमरीकी चुनाव में मात खानेवाले डेमोक्रेट उम्मीदवार अल गोर के साथ ऐसा नहीं हुआ.
अल गोर 2000 के चुनाव में जॉर्ज बुश से हारकर भी इतिहास में नाम दर्ज कर गए और अमरीकी चुनाव प्रक्रिया पर होनेवाली किसी भी बड़ी बहस में उनकी हार का ज़िक्र ज़रूर आता है.
और ये होता है इसलिए क्योंकि तब आम मतदाताओं के पॉपुलर वोटों और इलेक्टोरल कॉलेज के वोटों के बीच मामला ऐसा फंसा कि अदालत जाने की नौबत आ पड़ी.
आख़िरकार फ़्लोरिडा में बुश क़रीबी अंतर से आगे रहे और उस राज्य के सारे इलेक्टोरल वोट हासिल कर बुश विजेता बन गए हाँलाकि ज़्यादातर मतदाताओं ने वोट अल गोर को दिए.
इस वर्ष के चुनाव में जनमत सर्वेक्षणों के आधार पर बुश और केरी का मुक़ाबला काँटे का बताया जा रहा है जिसे देखते हुए ऐसी आशंका जताई जाने लगी है कि फ़्लोरिडा काँड दोबारा घट सकता है.
विवाद के विषय
जिन विषयों पर विवाद खड़ा हो सकता है उनमें एक अहम विषय है प्रोविज़नल वोटिंग की व्यवस्था.
दो साल पहले अमरीका में ऐसे क़ानून बनाए गए कि अगर मतदाता का नाम मतसूची में नहीं है तो भी उसे वोट देने दिया जाए मगर किसी मतदाता का मत गिना जाए या नहीं इसका फ़ैसला उसकी पहचान के बाद में किया जाएगा.
अब बताया जा रहा है कि कुछ राज्यों में मुक़ाबला बराबरी होने के समय ये प्रोविज़नल वोट निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं और इनको लेकर विवाद हो सकता है.
वहीं डाक से दिए जा सकने वाले पोस्टल मतदान पर भी विवाद की ख़बरें मिल रही हैं कि ग़लत नामों से या ग़लत ठिकानों से वोट दिए जा रहे हैं.
इस बार कहीं मामला अदालत ना चला जाए इसके लिए दोनों ही प्रतिद्वंद्वी खेमों ने पहले से ही ज़ोरदार तैयारी कर रखी है.
डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए सक्रियता से काम करनेवाली भारतीय महिला तलत हसन बताती हैं कि उनकी पार्टी ने 10,000 वकीलों को पहले से ही ठीक कर रखा है.
तलत हसन ने कहा,”अकेले हमारी पार्टी ने 10,000 वकीलों को तैनात किया है तो मैं समझती हूँ कि रिपब्लिकन पार्टी ने भी कम-से-कम इतने वकीलों को तैयार रखा ही होगा“.
उन्होंने कहा कि ये वकील मामला अदालत के दरवाज़े पहुँचने पर वहाँ तो लड़ाई लड़ेंगे ही, उसके पहले मतदान के दिन भी जगह-जगह मतदान केंद्रों पर जाकर ये देखेंगे कि कहीं कोई गड़बड़ी तो नहीं हो रही.
रिपब्लिकन पार्टी ने वकीलों के अलावा ऐसे हज़ारों कार्यकर्ताओं को तैयार रखा है जो मतदान केंद्रों पर जाकर निगरानी करेंगे.
व्यवस्था पर सवाल
पिछली बार के चुनाव में मामला अदालत में गया था और अंततः सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद ही फ़ैसला हो सका.
मगर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले पर संदेह प्रकट किए गए क्योंकि वहाँ न्यायाधीशों की नियुक्ति राजनीतिक आधार पर होती है.
अमरीकी राजनीति के जानकार डॉक्टर कैलाश जोशी कहते हैं,”सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश रिटायर नहीं होते और इस बात से काफ़ी फ़र्क पड़ता है कि उनकी नियुक्ति किस राष्ट्रपति ने की थी “.
वैसे इस बार अगर विवाद छिड़ा तो आम मतदाताओं को समझाना आसान नहीं होगा.
सैनफ़्रांसिस्को में सॉफ़्टवेयर इंजीनियर जेसी कहते हैं,”अगर जॉन केरी अल गोर की तरह सबसे अधिक मत पाने के बाद भी नहीं जीते तो ये मानना पड़ेगा कि कुछ गड़बड़ है और उसे ठीक करना ज़रूरी है“.
फ़िलहाल ये सारी स्थितियाँ बस अनुमान और आशंकाएँ लगती हैं मगर विश्लेषकों की राय में आम लोगों का भरोसा अमरीकी लोकतंत्र पर बना रहे, इसके लिए कुछ प्रभावी क़दम उठाया जाना बेहतर होगा.